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पारंपरिक हथकरघा का नया दौर: बिहार के बुनकरों द्वारा तैयार सिल्क फैब्रिक ने अंतरराष्ट्रीय फैशन वीक में बटोरी सुर्खियां

बिहार के पारंपरिक हथकरघा उद्योग ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी अनूठी छाप छोड़ी है। भागलपुर के कुशल बुनकरों द्वारा तैयार किए गए पर्यावरण-अनुकूल सिल्क फैब्रिक को पेरिस फैशन वीक में प्रदर्शित किया गया, जहां दुनिया भर के डिजाइनरों ने इसकी मुक्तकंठ से सराहना की।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:23
पारंपरिक हथकरघा का नया दौर: बिहार के बुनकरों द्वारा तैयार सिल्क फैब्रिक ने अंतरराष्ट्रीय फैशन वीक में बटोरी सुर्खियां
भारतीय पारंपरिक कला और शिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने की कड़ी में इस बार बिहार के भागलपुर और बांका जिलों के बुनकरों की मेहनत रंग लाई है। अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में गिने जाने वाले पेरिस फैशन वीक के दौरान एक प्रसिद्ध भारतीय डिजाइनर ने इन बुनकरों द्वारा तैयार किए गए विशेष 'ऑर्गेनिक सिल्क और मटका कॉटन' मिश्रण से बने वस्त्रों का संग्रह प्रस्तुत किया। पारंपरिक भारतीय लूम तकनीकों और आधुनिक पश्चिमी कटिंग शैलियों के इस अनूठे संगम ने वहां मौजूद विदेशी फैशन समीक्षकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस विशेष वस्त्र निर्माण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायनों का उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक रंगों और सूत का प्रयोग करते हुए इसे तैयार किया गया है, जो आज के समय में पर्यावरण के प्रति जागरूक वैश्विक उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।

राज्य के बुनकर समुदायों में खुशी की लहर

इस अंतरराष्ट्रीय सराहना की खबर जैसे ही बिहार के पारंपरिक बुनकर बहुल गांवों तक पहुंची, वहां जश्न का माहौल बन गया। दशकों से अपनी पीढ़ियों पुरानी कला को जिंदा रखने के लिए संघर्ष कर रहे इन कारीगरों को अब अपने काम की सही कीमत और वैश्विक पहचान मिलने की उम्मीद बंध गई है। राज्य सरकार के उद्योग विभाग ने भी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बुनकरों को आधुनिक डिजाइनिंग तकनीक और विपणन सहायता प्रदान करने के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में भागलपुर में एक अत्याधुनिक सिल्क डिजाइनिंग और टेस्टिंग सेंटर की स्थापना की जाएगी, जिससे स्थानीय कारीगर सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ व्यापारिक समझौते कर सकें और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त किया जा सके।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिल रहा है बढ़ावा

यह उपलब्धि प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' और वोकल फॉर लोकल के दृष्टिकोण को भी जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करती है। देश के सुदूर कोनों में छिपी हुई प्रतिभाओं को जब ऐसा वैश्विक मंच मिलता है, तो न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल मिलता है बल्कि पलायन की समस्या पर भी प्रभावी रोक लगती है। फैशन उद्योग के जानकारों का अनुमान है कि इस प्रदर्शन के बाद यूरोपीय बाजारों से भारतीय हथकरघा उत्पादों को करोड़ों रुपये के नए निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावना है। स्थानीय सहकारी समितियों ने अब अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना करने का निर्णय लिया है ताकि अंतरराष्ट्रीय मांग को समय पर पूरा किया जा सके और अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को इस रोजगार से जोड़ा जा सके।
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