कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल पुलिस का अलर्ट - तिब्बत की तरफ़ बना डैम टूटा, लोगों से सुरक्षित जगह पर जाने को कहा      Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat LIVE: खत्म हुआ राहुकाल! फिर शुरू हुआ राखी का शुभ मुहूर्त, जानिए कब तक बां      धोखाधड़ी, उत्पीड़न और फिर मर्डर; दिल्ली की मॉडल हत्या मामले में 'जहरीले रिश्ते' का खुलासा      ज़ोहरान ममदानी को लेकर प्रवासी भारतीयों में बहस, आरएसएस ने जारी किया ये बयान      आज लोकसभा चुनाव हुए तो BJP को मिलेंगी कितनी सीटें, इंडिया गठबंधन में शामिल दलों का कैसा हाल, C-वोटर का आया सर्वे      पाकिस्तान ने फंसाया एक और ‘मुर्गा’, सऊदी अरब-तुर्की के बाद इस देश के साथ मिलिट्री डील, बदले में क्या मिलेगा...      रिजिजू ने दिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत, परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें; विपक्ष में हलचल      दिल्ली आ गई 'कांदा एक्सप्रेस', 60-70 रुपये वाला प्याज अब 35 रुपये किलो, जानिए कहां मिलेगा?     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
लोकल

पारंपरिक कला का पुनरुत्थान: उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने वाराणसी में तैयार की दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल सिल्क साड़ी

वाराणसी के पारंपरिक जुलाहों और आधुनिक डिजिटल डिजाइनरों ने मिलकर एक अनूठी उपलब्धि हासिल करते हुए प्राचीन हथकरघा कला और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम पेश किया है।

X
Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 13:58
पारंपरिक कला का पुनरुत्थान: उत्तर प्रदेश के कलाकारों ने वाराणसी में तैयार की दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल सिल्क साड़ी
वाराणसी के बुनकर समुदाय ने सदियों पुरानी अपनी समृद्ध विरासत को आधुनिकता का जामा पहनाते हुए एक ऐसी भव्य सिल्क साड़ी तैयार की है जो पूरी दुनिया में आकर्षण का केंद्र बन गई है। लगभग 500 वर्ग मीटर में फैली इस विशालकाय साड़ी पर पारंपरिक जरी के काम के साथ-साथ क्यूआर कोड और संवर्धित वास्तविकता (AR) आधारित डिजाइन उकेरे गए हैं, जिन्हें स्कैन करने पर वाराणसी के घाटों का सजीव डिजिटल दर्शन होता है। इस अनूठी परियोजना को पूरा करने में शहर के पच्चीस कुशल बुनकरों को लगातार छह महीने की कड़ी मेहनत करनी पड़ी। मुख्य डिजाइनर उस्ताद अनवर अंसारी ने बताया कि इस साड़ी में शुद्ध मलबेरी सिल्क और असली सोने-चांदी के तारों का इस्तेमाल किया गया है, जो बनारस की पारंपरिक कारीगरी की सर्वोच्च उत्कृष्टता को दर्शाता है। इस कलाकृति का उद्देश्य वैश्विक बाजार में भारतीय हथकरघा उत्पादों को एक नया और आधुनिक मंच प्रदान करना है, ताकि युवा पीढ़ी भी अपनी पारंपरिक संस्कृति से जुड़ सके।

डिजिटल एकीकरण और पारंपरिक कारीगरी का मेल

इस साड़ी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पल्लू पर बुनी गई कलाकृतियां स्मार्टफोन के कैमरे के माध्यम से त्रि-आयामी (3D) रूप में जीवंत हो उठती हैं। बुनकरों ने पारंपरिक जाला और कमठ तकनीक के साथ आधुनिक पिक्सेल मैपिंग का ऐसा अद्भुत संयोजन किया है जो पहले कभी नहीं देखा गया था। इस कार्य में उत्तर प्रदेश वस्त्र मंत्रालय और राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के विशेषज्ञों ने भी तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया था ताकि गुणवत्ता में कोई कमी न आए। साड़ी के निर्माण के दौरान प्रत्येक धागे की मजबूती और चमक का विशेष ध्यान रखा गया ताकि यह सदियों तक सुरक्षित रह सके। इस कलाकृति को देखने के लिए पिछले दो दिनों से स्थानीय कारीगरों के कार्यशाला में देश-विदेश के पर्यटकों और वस्त्र प्रेमियों का तांता लगा हुआ है।

वैश्विक प्रदर्शन और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण

इस अनोखी डिजिटल सिल्क साड़ी को आगामी महीने में पेरिस और मिलान में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय फैशन सप्ताह में विशेष तौर पर प्रदर्शित किया जाएगा। इससे न केवल उत्तर प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों को वैश्विक पहचान मिलेगी बल्कि उनके उत्पादों की मांग में भी भारी उछाल आएगा। राज्य सरकार ने इस सफलता से उत्साहित होकर वाराणसी में एक विशेष 'डिजिटल हथकरघा उत्कृष्टता केंद्र' स्थापित करने की घोषणा की है, जहाँ युवा कारीगरों को आधुनिक सॉफ्टवेयर और पारंपरिक बुनाई का संयुक्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रकार, यह पहल परंपरा और आधुनिकता के बीच के अंतर को पाटते हुए भारतीय हस्तशिल्प को एक गौरवशाली भविष्य की ओर ले जा रही है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज