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पारंपरिक कला: मधुबनी के राजनगर प्रखंड में मिथिला पेंटिंग के आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र का हुआ भव्य शुभारंभ

बिहार के मधुबनी जिले के राजनगर क्षेत्र में पारंपरिक लोक कला को वैश्विक पहचान दिलाने और नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए आज एक अत्याधुनिक मिथिला पेंटिंग प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ हुआ है। इस केंद्र में युवा कलाकारों को प्राकृतिक रंगों के प्रयोग और आधुनिक डिजाइन की विशेष शिक्षा दी जाएगी।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 17:30
पारंपरिक कला: मधुबनी के राजनगर प्रखंड में मिथिला पेंटिंग के आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र का हुआ भव्य शुभारंभ
विश्व प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग की जन्मभूमि माने जाने वाले मधुबनी जिले के राजनगर प्रखंड में आज पारंपरिक कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। जिला प्रशासन और हस्तशिल्प विकास बोर्ड के संयुक्त प्रयासों से स्थापित इस आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र का आज गणमान्य अतिथियों और वरिष्ठ कलाकारों की उपस्थिति में उद्घाटन किया गया। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की उन प्रतिभाशाली महिलाओं और युवाओं को मंच प्रदान करना है जो पारंपरिक कला से जुड़ी हैं लेकिन आधुनिक विपणन और तकनीकी बारीकियों से अनजान थीं। यहाँ आने वाले प्रशिक्षुओं को प्राकृतिक रंगों के निर्माण से लेकर डिजिटल कैनवास पर पारंपरिक कलाकृतियां उकेरने तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विशेषज्ञ कलाकारों द्वारा दिया जाएगा मार्गदर्शन

उद्घाटन समारोह के दौरान राज्य के कई प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार से सम्मानित और वरिष्ठ चित्रकार उपस्थित रहे जिन्होंने अपनी कला के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि समय के साथ बाजार की मांग बदल रही है, इसलिए आधुनिक डिजाइन और कपड़ों पर पारंपरिक कला का प्रयोग समय की मांग है। इस केंद्र में सिलाई, कशीदाकारी और इको-फ्रेंडली कागजों पर पेंटिंग करने की विशेष प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को ई-कॉमर्स पोर्टल्स के माध्यम से अपने उत्पादों को देश-विदेश में बेचने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण महिलाओं में दिखा भारी उत्साह

इस केंद्र के खुलने से राजनगर और आसपास के दर्जनों गांवों की महिलाओं और युवतियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पहले दिन ही बड़ी संख्या में महिलाओं ने विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए अपना पंजीकरण कराया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भरोसा जताया कि यह केंद्र न केवल कला को जीवित रखेगा बल्कि पलायन की समस्या से जूझ रहे युवाओं को उनके अपने क्षेत्र में ही रोजगार के बेहतरीन अवसर उपलब्ध कराएगा। इस प्रकार के सांस्कृतिक और आर्थिक प्रयास बिहार की समृद्ध विरासत को एक नई ऊंचाई देने का काम कर रहे हैं।
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