बिहार के पटना जिले में मानसून की सक्रियता और संभावित भारी बारिश को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने आज एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद आपातकालीन नियंत्रण कक्ष का अनावरण किया है। कंकड़बाग, राजेंद्र नगर और बोरिंग रोड जैसे निचले इलाकों में जलभराव की पुरानी समस्याओं को दूर करने के लिए नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। आज सुबह से ही मुख्य नालों की डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) के काम की लाइव मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित इंजीनियरों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में मुस्तैद रहें ताकि किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
हाई-पंप सेट और जनरेटरों की तैनाती
जल निकासी को सुचारू बनाने के लिए पटना के विभिन्न संवेदनशील वार्डों में हाई-पंप सेट और मोबाइल जनरेटर तैनात किए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अनुसार, यदि किसी इलाके में पानी जमा होने की सूचना मिलती है, तो आधे घंटे के भीतर वहां पंप चालू कर दिए जाएंगे। इसके अलावा, नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है जिस पर कोई भी नागरिक जलभराव या नाला जाम होने की सूचना दर्ज करा सकता है। प्रशासन ने सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को अद्यतन जानकारी देना शुरू कर दिया है ताकि ट्रैफिक जाम से बचा जा सके।
यातायात मार्ग परिवर्तन और एहतियाती कदम
बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली यातायात समस्याओं से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कई वैकल्पिक मार्गों की रूपरेखा तैयार की है। जिन सड़कों पर अधिक पानी भरने की आशंका रहती है, वहां पहले से बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि वाहन चालक उन रास्तों पर न जाएं। पटना नगर निगम के स्वच्छता कर्मियों को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे नालियों के मुहानों पर पॉलीथिन या अन्य कचरा न जमा होने दें। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के इन अग्रिम प्रबंधों की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि इस बार उन्हें जलभराव के कारण होने वाली कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।