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रिश्वत का खेल: विरासत में मिली संपत्ति ट्रांसफर कराने में 58% परिवारों ने बताई परेशानी

देशभर में पूर्वजों से मिली संपत्ति को अपने नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में आम नागरिकों को किस हद तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इसे लेकर हाल ही में एक बड़ा खुलासा हुआ है। एक ताजा सर्वे के मुताबिक, करीब 58 फीसदी परिवारों ने माना है कि उन्हें इस काम में भारी रिश्वतखोरी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

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Ankit Yadav
07 सित 2026, 17:01
रिश्वत का खेल: विरासत में मिली संपत्ति ट्रांसफर कराने में 58% परिवारों ने बताई परेशानी
पूर्वजों से मिलने वाली संपत्ति या जायदाद का उत्तराधिकार अपने नाम ट्रांसफर करवाना किसी आम नागरिक के लिए एक बेहद जटिल और तनावपूर्ण प्रक्रिया बन चुका है। हाल ही में सामने आए एक नए सर्वे के आंकड़ों ने इस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सर्वे के नतीजों के अनुसार, लगभग 58 प्रतिशत परिवारों ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें अपने नाम संपत्ति के कागजात कराने के दौरान रिश्वत देने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ा। इस प्रकार के प्रशासनिक भ्रष्टाचार ने लोगों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे कानूनी वारिसों को दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

अधिकारियों की मनमानी और जटिल प्रक्रियाएं

आम तौर पर परिवार के मुखिया या बुजुर्ग की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति का मालिकाना हक वैध उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित किया जाना होता है। लेकिन ज़मीनी स्तर पर सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली इस प्रक्रिया को बेहद पेचीदा बना देती है। सर्वे से यह बात भी सामने आई है कि पारदर्शिता की कमी के कारण बिचौलियों और भ्रष्ट तंत्र का बोलबाला रहता है। लखनऊ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में लोग ऐसी प्रशासनिक जटिलताओं से त्रस्त हैं। जब नागरिक अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करते हुए विरासत की संपत्ति को ट्रांसफर कराने पहुंचते हैं, तो उन्हें विभिन्न स्तरों पर अनचाही अड़चनों का सामना करना पड़ता है, जिससे बचने के लिए कई बार उन्हें मजबूरी में अवैध भुगतान का सहारा लेना पड़ता है। पारदर्शिता के अभाव में सरकारी महकमों में होने वाले इन भ्रष्टाचार के मामलों पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आम आदमी को यह उम्मीद होती है कि बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ या मानसिक प्रताड़ना के उसे उसके हक की संपत्ति मिल जाएगी, परंतु वास्तविक स्थिति इसके विपरीत नजर आती है। सर्वे के खुलासों ने नीति निर्माताओं और प्रशासन के समक्ष एक गंभीर चुनौती पेश कर दी है, जिस पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

सुधार की मांग और भविष्य की उम्मीदें

इन तमाम परेशानियों के बीच नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा यह मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है कि संपत्ति हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए। डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और रिश्वतखोरी की गुंजाइश भी घटेगी। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन इस दिशा में कड़े कदम उठाए और जवाबदेही तय करे, तो आम परिवारों को इस तरह की प्रताड़ना से मुक्ति मिल सकती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर क्या सुधारात्मक कदम उठाती है।
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