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सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा में तमिलनाडु अव्वल: 'मक्कलाई थेडी मारुथुवम' योजना के तहत 2 करोड़वें लाभार्थी का हुआ इलाज

घर-घर जाकर गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) का मुफ्त इलाज और दवाइयां पहुंचाने वाली तमिलनाडु सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजना ने 2 करोड़ से अधिक नागरिकों तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया है।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 18:36
सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा में तमिलनाडु अव्वल: 'मक्कलाई थेडी मारुथुवम' योजना के तहत 2 करोड़वें लाभार्थी का हुआ इलाज
तमिलनाडु सरकार की विश्व प्रसिद्ध और महत्वाकांक्षी डोर-टू-डोर स्वास्थ्य सेवा योजना 'मक्कलाई थेडी मारुथुवम' (Makkalai Thedi Maruthuvam - दवाएं जनता के द्वार) ने एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान हासिल कर लिया है। कांचीपुरम जिले में आयोजित एक विशेष नागरिक स्वास्थ्य सम्मेलन के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि इस योजना के तहत अब तक 2 करोड़ से अधिक पात्र राज्यवासियों को उनके घर के दरवाजे पर जाकर मुफ्त प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, डायलिसिस सेवाएं, फिजियोथेरेपी और मधुमेह (Diabetes) व उच्च रक्तचाप (Hypertension) की दवाएं सफलतापूर्वक पहुंचाई जा चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस मॉडल की सराहना की है।

महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और फिजियोथेरेपिस्टों की भूमिका

इस योजना की सफलता की असली रीढ़ राज्य की हजारों 'महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता' (Women Health Volunteers - WHVs), नर्सें और फिजियोथेरेपिस्ट हैं, जो रोजाना ग्रामीण और शहरी झुग्गी झोपड़ियों में जाकर बुजुर्गों और चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों की जांच करती हैं। योजना के तहत मरीजों को हर महीने उनके घर पर ही एक महीने की आवश्यक दवाइयां का किट निःशुल्क प्रदान किया जाता है, जिससे उन्हें बार-बार सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने और कतारों में खड़े होने की परेशानी से मुक्ति मिल गई है। इससे गरीब परिवारों के समय और पैसे दोनों की भारी बचत हो रही है।

गैर-संचारी रोगों पर नियंत्रण और समय पर उपचार

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, योजना की शुरुआत के बाद से राज्य में हृदयघात (Heart Attack) और स्ट्रोक के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई है, क्योंकि लोगों के रक्तचाप और शुगर के स्तर की समय रहते जांच और नियमित दवा मिलना संभव हो सका है। तमिलनाडु सरकार अब इस योजना के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें मानसिक स्वास्थ्य परामर्श (Mental Health Counseling) और बुजुर्गों की विशेष देखभाल (Geriatric Care) को भी जोड़ने जा रही है। यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय और सर्वव्यापी मॉडल बन चुकी है।
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