वाराणसी जिले में लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आज सुबह से ही दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और वरुणानदी के संगम के पास के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे तटीय बस्तियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव दलों को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
प्रशासन द्वारा स्थापित किए गए राहत शिविर
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पानी बढ़ने से नाव संचालन और पंडा समाज की आजीविका पर भी असर पड़ा है। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बैरिकेडिंग करके पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोका जा रहा है। नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रख रही हैं और लोगों को सतर्क रहने के लिए लाउडस्पीकर के माध्यम से निर्देश दिए जा रहे हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर स्थिति की समीक्षा की है और प्रभावितों के लिए भोजन तथा पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी तटीय इलाकों में तैनात किया गया है ताकि जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक दवाइयां और ओआरएस के पैकेट बांटे जा सकें। प्रशासन ने एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है जहां लोग किसी भी सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले चौबीस घंटों में बारिश की गतिविधियों में थोड़ी कमी आ सकती है, जिससे जलस्तर में ठहराव आने की उम्मीद है, फिर भी स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।