राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी नीतिगत निर्णय लिया है। नए दिशानिर्देशों के तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के ठीक 1 किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की सौर ऊर्जा (Solar Power), पवन ऊर्जा (Wind Energy) या अन्य अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों से सटे सीमावर्ती जिलों में तैनात सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमताओं (operational capabilities), रडार प्रणालियों और निगरानी उपकरणों में होने वाले तकनीकी व्यवधानों को पूरी तरह से समाप्त करना है।
सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी गई एक विस्तृत तकनीकी समीक्षा रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया था कि विशालकाय सौर पैनलों के शीशे और पवन टर्बाइनों के ऊंचे घूमने वाले पंखे सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर नजर रखने वाले रडार सिग्नलों में परावर्तन (reflection) और भारी फ्रिक्वेंसी नॉइज़ पैदा करते हैं। इसके अलावा, सीमा रेखा के बिल्कुल करीब लगे ये ढांचे घुसपैठियों और अवैध ड्रोन गतिविधियों को पकड़ने में इस्तेमाल होने वाले ऑप्टिकल सेंसर्स, नाइट-विज़न कैमरों और थर्मल इमेजरों की दृश्यता में भी बाधा डालते हैं। इसी वजह से रक्षा मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ संयुक्त बैठक कर यह नया सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया है।
मौजूदा परियोजनाओं की होगी उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा
गृह मंत्रालय के नए आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि जो सौर या पवन ऊर्जा परियोजनाएं 1 किलोमीटर के इस प्रतिबंधित दायरे में पहले से ही स्थापित हैं या निर्माणाधीन हैं, उनकी एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समिति द्वारा विस्तृत तकनीकी समीक्षा की जाएगी। यदि जांच के दौरान कोई भी प्रोजेक्ट सीमा सुरक्षा तंत्र, गश्त या रडार सिस्टम के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खतरा पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से दूसरे स्थानों पर री-लोकेट करने के सख्त निर्देश दिए जाएंगे। इस संबंध में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और जिलाधिकारियों को भी आदेश की प्रति भेज दी गई है।
इसके साथ ही, सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सीमा रेखा से 1 किलोमीटर से अधिक दूरी वाले क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विकास पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहेगा। सरकार के इस कदम से देश के महत्वाकांक्षी हरित ऊर्जा लक्ष्यों पर कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, जबकि सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और ड्रोन आधारित तस्करी के खिलाफ हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत, सटीक और अभेद्य हो जाएगी।