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राजनीतिक हलचल: लोकसभा सचिवालय ने 20 बागी टीएमसी सांसदों को नोटिस भेजकर मांगा जवाब

संसद के निचले सदन में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। लोकसभा सचिवालय द्वारा इन सभी को औपचारिक नोटिस जारी कर अयोग्यता की अर्जी पर एक हफ्ते के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।

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Ankit Yadav
27 अग 2026, 14:43
राजनीतिक हलचल: लोकसभा सचिवालय ने 20 बागी टीएमसी सांसदों को नोटिस भेजकर मांगा जवाब
भारतीय राजनीतिक गलियारों में उस वक्त सरगर्मी तेज हो गई जब लोकसभा सचिवालय की ओर से एक बड़ा कदम उठाया गया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी से बगावत करने वाले कुल 20 सांसदों के खिलाफ दल-बदल या अयोग्यता की याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए सचिवालय ने सभी संबंधित बागी सांसदों को नोटिस थमा दिया है। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि वे सात दिनों के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करें और अयोग्यता की इस अर्जी के संबंध में अपना जवाब दाखिल करें। इस कार्रवाई से राजनीतिक दलों के भीतर आंतरिक कलह और दलबदल विरोधी कानूनों के दायरे पर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है।

संसदीय नियमों के तहत कार्रवाई

भारतीय संविधान और संसदीय प्रणाली के प्रावधानों के अनुसार, जब भी किसी पार्टी के सांसद अपने ही दल के खिलाफ मुखर होते हैं या व्हिप का उल्लंघन करते हैं, तो पार्टी नेतृत्व उनके खिलाफ अयोग्यता की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर कर सकता है। मौजूदा मामले में, टीएमसी के बागी सांसदों द्वारा पार्टीलाइन से अलग रुख अपनाने के बाद यह याचिका दाखिल की गई थी। सचिवालय के इस ताजा निर्देश के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ये सांसद सात दिन की तय सीमा के भीतर क्या और कैसा जवाब देते हैं। यदि उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर उनके खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिससे उनकी सांसदी पर भी तलवार लटक सकती है। देश की राजनीति में यह घटनाक्रम ऐसे वक्त पर सामने आया है जब विभिन्न राज्यों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। क्षेत्रीय दलों में आंतरिक असंतोष और बगावत के सुर अक्सर उभरते रहते हैं, लेकिन जब मामला सीधे संसद के निचले सदन और सांसदों की सदस्यता पर आ जाए, तो उसका असर राष्ट्रीय स्तर पर पड़ता है। पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाली तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए अपने ही सांसदों का इस तरह बागी होना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पार्टी आलाकमान पहले ही ऐसे नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दे चुका था, और अब सचिवालय के नोटिस के बाद इस प्रक्रिया को औपचारिक बल मिल गया है। आगामी दिनों में इस पूरे प्रकरण पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की पूरी उम्मीद है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही खेमे इस घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। सात दिन की यह मोहलत पूरी होने के बाद जब बागी सांसद अपने जवाब सौंपेंगे, तो उसके आधार पर लोकसभा सचिवालय अपनी अगली रिपोर्ट या निर्णय तैयार करेगा। यदि इस मामले में कोई बड़ा फैसला आता है, तो यह देश के राजनीतिक इतिहास में दलबदल मामलों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। फिलहाल, सभी संबंधित सांसदों के खेमों में कानूनी सलाहकारों के साथ बैठकों का दौर शुरू हो चुका है ताकि तय समयसीमा के भीतर सटीक और मजबूत जवाब दाखिल किया जा सके।
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