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बिगड़ती स्थिति: हरियाणा में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई, भाजपा सरकार अपराधियों के सामने बेबस: चौधरी अभय सिंह चौटाला
हरियाणा में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। वरिष्ठ नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला ने मौजूदा शासन व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि राज्य में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और प्रशासन पूरी तरह से लाचार नजर आ रहा है।
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Ankit Yadav
11 सित 2026, 13:39
हरियाणा प्रदेश के अंदर सुरक्षा तंत्र और कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों और जनता के बीच भारी रोष देखने को मिल रहा है। राज्य में लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं, लूटपाट, और वारदातों के बीच शासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इसी कड़ी में इंडियन नेशनल लोकदल के वरिष्ठ नेता और प्रमुख राजनीतिक हस्ती चौधरी अभय सिंह चौटाला ने प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार को आड़े हाथों लिया है। उनका स्पष्ट रूप से यह कहना है कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य का पूरा ढांचा पटरी से उतर चुका है और अधिकारी अपराधियों पर नकेल कसने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।
बढ़ता अपराध और शासन की नाकामी
चौधरी अभय सिंह चौटाला ने एक तीखे बयान में आरोप लगाया है कि हरियाणा के भीतर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं बचा है। राज्यभर से रोजाना हत्या, फिरौती, अपहरण और चोरी जैसी गंभीर घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं, जो आम नागरिकों के जीवन को असुरक्षित बना रही हैं। उनका कहना था कि पुलिस प्रशासन राजनीतिक दबाव और इच्छाशक्ति की कमी के कारण सही समय पर ठोस कार्रवाई करने में असमर्थ है। जनता खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रही है क्योंकि जो सरकार सुरक्षा देने का वादा करके सत्ता में आई थी, वही आज असामाजिक तत्वों के सामने पूरी तरह लाचार और बेबस नजर आ रही है।
इस बिगड़ती हुई व्यवस्था का असर केवल आम जनजीवन पर ही नहीं बल्कि प्रदेश की समग्र विकास यात्रा और निवेश के माहौल पर भी पड़ रहा है। जब किसी भी क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल डगमगाता है, तो उसका सीधा नकारात्मक प्रभाव व्यापार, उद्योग और युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी यह मानना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक कसावट नहीं लाई गई और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई, तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। विपक्षी दल लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं और यह दबाव बना रहे हैं कि पुलिस विभाग को पूरी तरह स्वतंत्र और मुस्तैद किया जाए ताकि जनता में सुरक्षा की भावना दोबारा पैदा हो सके।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति में और अधिक गरमागरम बहस होने के पूरे आसार हैं। विपक्षी नेता जनता के इन मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरने और सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। दूसरी ओर, शासन और प्रशासन के नुमाइंदे इस प्रकार के आरोपों को खारिज करते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के अपने दावों को दोहरा रहे हैं। हालांकि, ज़मीनी हकीकत और जनता के बीच पनप रहा असंतोष इस बात की गवाही दे रहा है कि सुरक्षा के मोर्चे पर सुधार लाने के लिए सरकार को तत्काल और कड़े कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है, ताकि प्रदेशवासियों का खोया हुआ विश्वास वापस लौटाया जा सके।