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राजनीति

बिजली संकट पर एक्शन: राजस्थान में लगातार हो रही कटौती पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुलाई ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक

राजस्थान में इन दिनों बिजली की आवाजाही को लेकर आम जनता के साथ-साथ सरकार की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। इसी बीच राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है, जिसमें व्यवस्था को सुधारने पर चर्चा की गई।

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Ankit Yadav
05 सित 2026, 12:29
बिजली संकट पर एक्शन: राजस्थान में लगातार हो रही कटौती पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुलाई ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक
राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में सामने आ रही बिजली कटौती की शिकायतों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। आम नागरिकों और किसानों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिलने में आ रही बाधाओं के मद्देनजर राज्य सरकार पूरी तरह से सतर्क नजर आ रही है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए राजधानी जयपुर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मौजूदा बिजली संकट के कारणों की थाह लेना और उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

राजस्थान में विद्युत प्रबंधन को लेकर बुलाई गई इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के तमाम बड़े अधिकारियों और नीति निर्माताओं से फीडबैक लिया। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान राज्य भर में ट्रांसमिशन नेटवर्क, ग्रिड की स्थिति और बिजली उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम जनता और विशेष रूप से कृषि क्षेत्र से जुड़े उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए। उन्होंने ग्रीष्मकाल या अन्य कारणों से बढ़ती मांग के बीच आपूर्ति संतुलन को बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम करने के आदेश भी दिए हैं। राज्य में बिजली संकट का यह मामला ऐसे समय में गरमाया है जब लोग पहले से ही अनियोजित शटडाउन और फॉल्ट की समस्याओं से जूझ रहे हैं। विद्युत आपूर्ति की अनियमितता न केवल आम घरेलू उपभोक्ताओं के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि औद्योगिक इकाइयों और ग्रामीण इलाकों में सिंचाई कार्यों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने सीधे तौर पर हस्तक्षेप किया है ताकि प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही तय की जा सके। अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की ढिलाई को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

आगे की रणनीति और जनता से उम्मीदें

इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि ऊर्जा विभाग जल्द ही राज्य के सभी जिलों में विद्युत वितरण प्रणाली की मॉनिटरिंग तेज करेगा। मेंटेनेंस के नाम पर होने वाली अनावश्यक कटौतियों को न्यूनतम करने और फॉल्ट्स को कम समय में दुरुस्त करने के लिए तकनीकी टीमों को मैदान में उतारने की तैयारी है। सरकार का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को एक सुचारू और भरोसेमंद बिजली नेटवर्क का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख के बाद अब देखना यह होगा कि विभागीय स्तर पर उठाए जाने वाले इन कदमों से मैदानी हकीकत में कितनी जल्दी सुधार देखने को मिलता है।
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