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राजनीति

राजनीतिक हमला: शिक्षक दिवस पर अखिलेश यादव ने यूपी सरकार को घेरा और 'पाठशाला पुकारे' अभियान की शुरुआत की

शिक्षक दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर बड़ा सियासी हमला बोला है। उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का आरोप लगाते हुए एक नए अभियान का ऐलान किया है।

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Ankit Yadav
05 सित 2026, 12:46
राजनीतिक हमला: शिक्षक दिवस पर अखिलेश यादव ने यूपी सरकार को घेरा और 'पाठशाला पुकारे' अभियान की शुरुआत की
शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर जहां एक तरफ देश भर में शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है और उनके योगदान को सराहा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की राजनीति में शिक्षा के मुद्दों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने सूबे की बदहाल स्कूली शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की समस्याओं को मुख्यधारा के राजनीतिक मंच पर लाते हुए एक तीखा वार किया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पाठशाला पुकारे अभियान का आगाज

इस विशेष अवसर पर अखिलेश यादव ने राज्य के शिक्षण संस्थानों की दशा सुधारने के लिए 'पाठशाला पुकारे' नामक एक नए राजनीतिक और सामाजिक अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की बुनियादी समस्याओं, शिक्षकों की कमी, संसाधनों के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करना है। समाजवादी पार्टी का मानना है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इस कैंपेन के माध्यम से पार्टी सरकार पर जनता के प्रति जवाबदेह बनने का दबाव बनाने की योजना बना रही है ताकि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा विपक्ष के तरकश का एक अहम तीर साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश में शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे हमेशा से ही चुनावी राजनीति के केंद्र में रहे हैं। शिक्षकों और युवाओं का एक बड़ा वर्ग सरकार की नीतियों से प्रभावित होता है, ऐसे में इस तरह के अभियानों के जरिए विपक्षी दल जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। 'पाठशाला पुकारे' अभियान के तहत पार्टी कार्यकर्ता और नेता विभिन्न जिलों में जाकर स्कूलों की जमीनी हकीकत जनता के सामने रखेंगे और सरकार की विफलताओं को उजागर करेंगे। उधर, सत्तारूढ़ दल की ओर से इस सियासी हमले पर तीखी प्रतिक्रिया आने की पूरी संभावना है। सरकार का हमेशा से यह दावा रहा है कि उन्होंने प्रदेश में बुनियादी ढांचे में सुधार किया है और कई नई योजनाओं के जरिए शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने का काम किया है। बहरहाल, शिक्षक दिवस के दिन इस प्रकार के आक्रामक राजनीतिक अभियान की शुरुआत से राज्य का सियासी पारा गर्मा गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार नजर आ रहे हैं।
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