बिना अनुमति होर्डिंग लगाने पर कानूनी शिकंजा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन यानी एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव के खिलाफ स्थानीय प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाते हुए औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह पूरी कानूनी कार्रवाई नगर निगम के अपर आयुक्त के निर्देश और उनकी सीधी देखरेख में सुनिश्चित की गई है। प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त पुख्ता जानकारियों के मुताबिक, आरोपी पदाधिकारी की ओर से शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी तरह की पूर्व अनुमति या वैध लाइसेंस लिए बिना अवैध रूप से बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनर लगवाए गए थे। नगर निगम के अधिकारियों द्वारा जब शहर की संपत्तियों और सौंदर्यीकरण का निरीक्षण किया जा रहा था, तब इस बात का खुलासा हुआ कि बिना वैधानिक अनुमति के इस तरह बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्रियां प्रदर्शित करना स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध है और इससे शहर की सार्वजनिक व्यवस्था तथा यातायात में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसके बाद नगर निगम की टीम ने नियमों का हवाला देते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ थाने में तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और पूरे घटनाक्रम की गहराई से छानबीन शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस अवैध होर्डिंगबाजी में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
सार्वजनिक संपत्ति और विज्ञापन के कड़े नियम शहरी क्षेत्रों में अनुशासन बनाए रखने और शहर की सुंदरता को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय प्रशासन तथा नगर निगम के स्तर पर बेहद कड़े नियम और उपनियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना हर राजनीतिक दल, संगठन और आम नागरिक के लिए अनिवार्य होता है। किसी भी सार्वजनिक स्थान, पार्क, बिजली के खंभों, सरकारी दीवारों या सड़कों के किनारे होर्डिंग, पोस्टर या बैनर लगाने से पहले नगर निगम कार्यालय से विधिवत अनुमति लेनी पड़ती है और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शहर में अव्यवस्था न फैले और विज्ञापनों के कारण चालकों का ध्यान भार्गव या अन्य दुर्घटनाओं की आशंका न रहे। हालांकि, अक्सर यह देखने को मिलता है कि राजनीतिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता अपनी ताकत दिखाने या अपने नेताओं के स्वागत के लिए नियमों को ताक पर रखकर रातोंरात पूरे शहर को अवैध होर्डिंगों से पाट देते हैं। इस तरह की गतिविधियां न केवल नगर निगम के राजस्व को चूना लगाती हैं, बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाती हैं। गोरखपुर नगर निगम प्रशासन द्वारा की गई यह नवीनतम कार्रवाई इसी बात का प्रमाण है कि अवैध रूप से पोस्टर और बैनर लगाने वालों के प्रति अब प्रशासन किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं है और भविष्य में भी इस तरह के अभियानों के खिलाफ लगातार औचक निरीक्षण और दंडात्मक कदम उठाए जाते रहेंगे।
राजनीतिक सरगर्मी और आगामी प्रशासनिक कदम इस ताजा कानूनी कार्रवाई के सामने आने के बाद से ही स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भारी सुगबुगाहट शुरू हो गई है और विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि प्रशासन अब इस तरह के मामलों में कितनी सख्ती दिखा रहा है। एक तरफ जहां नगर निगम के अधिकारी अपने इस कदम को कानून का पालन कराने और शहर की व्यवस्था सुधारने की दिशा में एक जरूरी प्रयास बता रहे हैं, वहीं विपक्षी खेमे और संबंधित संगठन के समर्थकों की ओर से इसे लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं और विरोध के स्वर भी सामने आने लगे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाईयां राजनीतिक विरोध का कारण भी बन सकती हैं क्योंकि चुनावी और राजनीतिक गतिविधियों के दौरान अक्सर शक्ति प्रदर्शन के लिए इस प्रकार के होर्डिंग लगाने का चलन बहुत आम रहा है। पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीमें अब इस बात की भी सुरागकशी कर रही हैं कि शहर के अन्य हिस्सों में जिन अवैध होर्डिंगों और बैनर को लगाया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और जिन लोगों ने भी नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं, उन्हें चिन्हित करके उनके विरुद्ध भी कानूनी शिकंजा कसा जाए। इस पूरे प्रकरण से शहर के अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं में भी हड़कंप मच गया है और वे अब बिना अनुमति किसी भी प्रकार के प्रचार प्रसार से बचने की कोशिश कर रहे हैं।