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राजनीति ब्रेकिंग

खनन कानून पर राजनीतिक संग्राम: ओडिशा का पूरा विपक्ष राष्ट्रपति से मिलकर एमएमडीआर संशोधन विधेयक को रोकने की गुहार लगाएगा

संसद के दोनों सदनों से खान और खनिज संशोधन विधेयक पारित होने के बाद ओडिशा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है।

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Ankit Yadav
20 अग 2026, 11:30
खनन कानून पर राजनीतिक संग्राम: ओडिशा का पूरा विपक्ष राष्ट्रपति से मिलकर एमएमडीआर संशोधन विधेयक को रोकने की गुहार लगाएगा
देश की संसद द्वारा हाल ही में पारित किए गए खान और खनिज विकास और विनियमन संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक गलियारों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। विशेष रूप से खनिज समृद्ध राज्य ओडिशा में इसे लेकर जबरदस्त सियासी बवाल मचा हुआ है, जहां तमाम विपक्षी दल एकजुट होकर राष्ट्रपति के पास जाने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्ष का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति से यह औपचारिक अपील करना है कि वे इस नए कानून पर अपने हस्ताक्षर न करें, क्योंकि उनका मानना है कि इससे राज्य के अधिकारों और स्थानीय हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। लोकसभा और राज्यसभा में इस विधेयक के पारित होने के बाद से ही क्षेत्रीय दलों और विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की इस नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने के आसार नजर आ रहे हैं।

विपक्ष की आपत्तियां और चिंताएं

विपक्षी दलों के नेताओं का तर्क है कि इस नए संशोधन से खनिज बहुल राज्यों की स्वायत्तता सीमित हो जाएगी और स्थानीय संसाधनों के दोहन पर नियंत्रण कमजोर होगा। उनका यह भी कहना है कि इस प्रकार के नीतिगत बदलावों से पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आदिवासी समुदायों के अधिकारों की अनदेखी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी चिंता को लेकर सभी विरोधी दल आपसी मतभेदों को भुलाकर एक साझा मंच पर आ गए हैं और वे राष्ट्रपति भवन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपने की रणनीति बना रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो खनन क्षेत्रों के प्रबंधन में कॉरपोरेट घरानों का दखल अत्यधिक बढ़ जाएगा, जिसका दीर्घकालिक नुकसान राज्य की जनता को उठाना पड़ेगा।

केंद्र सरकार का पक्ष और सुधार

दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इन सभी विरोध प्रदर्शनों और आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह संशोधन देश के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और उत्पादन को बढ़ाने के लिए बेहद आवश्यक है। सरकार का यह दावा है कि इस सुधार से देश के खनिज संसाधनों का दोहन अधिक वैज्ञानिक और आधुनिक तरीकों से हो सकेगा, जिससे राजस्व में वृद्धि होगी और राष्ट्र निर्माण के कार्यों को गति मिलेगी। उद्योग विशेषज्ञों का भी एक वर्ग इस कानून का समर्थन कर रहा है और उनका मानना है कि इससे अनावश्यक नौकरशाही की अड़चनें दूर होंगी और निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी। बहरहाल, राष्ट्रपति के पास जाने के विपक्षी दलों के फैसले ने इस पूरे विधाई मामले को एक बेहद दिलचस्प राजनीतिक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
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