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राजनीति ब्रेकिंग

नीट पर सियासी रार: तमिलनाडु विधानसभा में परीक्षा समाप्त करने का प्रस्ताव पारित, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज

तमिलनाडु विधानसभा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को पूरी तरह समाप्त करने की मांग को लेकर एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए नया प्रस्ताव पारित किया है। राज्य सरकार का कहना है कि यह परीक्षा ग्रामीण छात्रों के हितों के खिलाफ है।

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Kantap News डेस्क
11 अग 2026, 14:47
नीट पर सियासी रार: तमिलनाडु विधानसभा में परीक्षा समाप्त करने का प्रस्ताव पारित, वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज
देश भर में मेडिकल प्रवेश के लिए अनिवार्य माने जाने वाली नीट परीक्षा के खिलाफ तमिलनाडु की राजनीति में विरोध के सुर एक बार फिर तेज हो गए हैं। राज्य विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सरकार ने सर्वसम्मति से नीट परीक्षा को खत्म करने का प्रस्ताव पारित किया है। राजनीतिक दलों का तर्क है कि यह प्रवेश परीक्षा गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के उन मेधावी छात्रों के सपनों को तोड़ रही है जो महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस वहन करने में असमर्थ हैं। राज्य का मानना है कि बारहवीं कक्षा के अंकों के आधार पर ही मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश की पुरानी पारदर्शी व्यवस्था को बहाल किया जाना चाहिए।

संघीय ढांचे और शिक्षा पर बहस

इस नए प्रस्ताव के पारित होने के बाद केंद्र और राज्य के बीच एक बार फिर से शिक्षा के अधिकार और संघीय ढांचे को लेकर वैचारिक टकराव गहराने की संभावना जताई जा रही है। विपक्षी दलों और स्थानीय संगठनों का समर्थन मिलने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी तूल पकड़ने लगा है। शिक्षाविदों का एक वर्ग जहां नीट को योग्यता का पैमाना मानता है, वहीं तमिलनाडु सरकार का मानना है कि यह परीक्षा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है और इसके कारण कई छात्र अत्यधिक मानसिक दबाव में आकर चरम कदम उठाने को मजबूर हो चुके हैं।

आगामी कानूनी और राजनीतिक रणनीति

विधानसभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव को अब औपचारिक रूप से राष्ट्रपति के पास भेजने की तैयारी है ताकि इस पर कानूनी और संवैधानिक विचार किया जा सके। राज्य के राजनीतिक नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक नीट को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जाता, तब तक उनका संघर्ष विभिन्न मंचों पर जारी रहेगा। इस घटनाक्रम ने देश भर के अन्य गैर-भाजपा शासित राज्यों में भी समान विचारधारा वाली चर्चाओं को हवा दे दी है, जिससे आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर गरमागरम बहस देखने को मिल सकती है।
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