अखिलेश यादव का भाजपा सरकार पर करारा प्रहार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर तक जलभराव की गंभीर समस्या को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर अत्यंत तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने तीखे बयानों के माध्यम से यह आरोप लगाया कि प्रदेश के बड़े और छोटे सभी शहर जल निकासी के मामले में पूरी तरह से विफल साबित हो रहे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब लगातार हो रही मानसूनी बारिश या प्रशासनिक लापरवाही के कारण शहरी इलाकों में सड़कों और रिहायशी बस्तियों में पानी भर जाने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर राज्य सरकार की प्रशासनिक मशीनरी को इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जनता को बुनियादी सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं और धरातल पर स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है।
भ्रष्टाचार के आरोपों से शहरी योजनाओं पर उठे सवाल शहरी विकास और जल निकासी प्रणालियों के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये के बजट का आवंटन किया जाता है, लेकिन धरातल पर नाले चोक और सीवर ओवरफ्लो होना आम बात बन चुकी है। इसी व्यवस्थागत खामी को आधार बनाते हुए विपक्षी नेताओं ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। बुनियादी नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम और संबंधित विकास प्राधिकरणों द्वारा मानसून पूर्व तैयारियों के दावे किए जाते हैं, परंतु हल्की सी बारिश के बाद ही सारे दावों की पोल खुल जाती है। जलभराव के कारण न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है बल्कि दूषित पानी के जमा होने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अनियोजित शहरीकरण, भ्रष्टाचार और समय पर नालों की सफाई न होना इन समस्याओं की मुख्य जड़ है। जब तक प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की जाएगी और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता नहीं लाई जाएगी, तब तक नागरिकों को इस प्रकार की समस्याओं से स्थायी राहत मिलना असंभव है और हर साल बरसात के मौसम में लोगों को इसी प्रकार की दुश्वारियों से दो-चार होना पड़ेगा।
जनता की नाराजगी और आगामी राजनीतिक समीकरण शहरी क्षेत्रों में जलभराव और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर आम जनता के बीच गहरा आक्रोश व्याप्त है, जिसे विपक्षी दल आगामी राजनीतिक रणनीतियों में भुनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और सत्ता पक्ष पर जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का मानना है कि सरकार विज्ञापनों और दावों के जरिए वास्तविक जमीननी हकीकत को छिपाने की कोशिश कर रही है, जबकि जनता बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक एक बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ सकता है, जिससे सरकार पर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और नगर विकास योजनाओं की गहन समीक्षा करने का भारी दबाव बनेगा। स्थानीय निकाय चुनाव हों या आम चुनाव, जलभराव और खराब जल निकासी जैसी जनसमस्याएं हमेशा से राजनीतिक दलों के प्रदर्शन का पैमाना रही हैं और जनता इस मोर्चे पर हर जनप्रतिनिधि से जवाब तलब कर रही है।