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राजनीति ब्रेकिंग

वैचारिक आतंकवाद पर प्रहार: प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से 'दिमागी नक्सलवाद' को पहचान कर अलग करने की दी चेतावनी

स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र हिंसा के कम होने का जिक्र करते हुए देश को वैचारिक और बौद्धिक नक्सलियों से सतर्क रहने की सख्त चेतावनी दी है।

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Kantap News डेस्क
17 अग 2026, 17:33
वैचारिक आतंकवाद पर प्रहार: प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से 'दिमागी नक्सलवाद' को पहचान कर अलग करने की दी चेतावनी
लाल किले की प्राचीर से देश के नाम अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर एक गंभीर और विचारणीय मुद्दा उठाया। उन्होंने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि भले ही अब देश के विभिन्न हिस्सों से सशस्त्र नक्सलवाद का प्रभाव कमजोर पड़ रहा है और हथियारबंद उग्रवादी लगभग समाप्त हो चुके हैं, लेकिन एक नया खतरा अभी भी सक्रिय है जिसे 'दिमागी नक्सलवाद' या वैचारिक नक्सलवाद कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि इस खास माओवादी मानसिकता से जुड़े लोग समाज और शासन व्यवस्था के भीतर रहकर अपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने देश के नागरिकों और युवाओं से आह्वान किया कि ऐसे वैचारिक घुसपैठियों को समय रहते पहचानें और उन्हें पूरी तरह से अलग-थलग कर दें।

बौद्धिक मोर्चे पर सतर्कता की जरूरत

प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में विभिन्न स्तरों पर वैचारिक बहसों और सांस्कृतिक बहसों का दौर चल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सशस्त्र संघर्ष के मोर्चे पर सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलताओं के बाद अब सरकार का ध्यान देश की बौद्धिक और वैचारिक संस्थाओं में छिपे उन तत्वों पर है जो कथित तौर पर नकारात्मकता और विघटनकारी सोच को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार की मानसिकता समाज में भ्रम फैलाने और संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने का काम करती है। सरकार की स्पष्ट नीति है कि विकास की गति को बाधित करने वाली इस छिपी हुई चुनौती से निपटने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर एक जनचेतना चलानी होगी।

सुरक्षा और सामाजिक समरसता का संदेश

देश की आंतरिक शांति और अखंडता को बनाए रखने के लिए इस प्रकार की वैचारिक चेतावनियों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि सरकार आने वाले दिनों में देशविरोधी और विघटनकारी विचारधाराओं के खिलाफ प्रशासनिक और वैचारिक दोनों स्तरों पर अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करेगी। राष्ट्र निर्माण की दिशा में नागरिकों की सजगता को ही सबसे बड़ा हथियार बताते हुए प्रधानमंत्री ने देश को एकजुट होकर आगे बढ़ने का मजबूत संदेश दिया है।
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