कंटाप
NEWS
रविवार, 6 सितंबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट में पांच मंज़िला इमारत गिरी, छह लोगों को बचाया गया      झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, देर रात पड़ा दिल का दौरा      कल का मौसम 7 सितंबर: 17 घंटे के भीतर 22 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 50 की स्पीड से हवा; IMD का अपडेट      सहारनपुर में तोड़ी गई जो मस्जिद, उसके नीचे से निकला कुआं; सामने आया वीडियो      मैप में क्यों बदलने जा रही दुनिया, UN में भारत की हां; लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर रखी एक शर्त      काग़ज़ी पार्टियों को चंदाः बीबीसी की पड़ताल पर क्या बोले राजनीतिक दल और विश्लेषक      ISRO के निजीकरण पर 9 कर्मचारी यूनियनों ने लिखी चिट्ठी, पूछा- क्या हम सिर्फ रिसर्च करेंगे      'शिक्षा-रोजगार मांगने पर गोली मार दी?', सीवान में घायल छात्रों से मिले राहुल गांधी, PM-CM से पूछे तीखे सवाल     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
टेक्नोलॉजी

आलू उत्पादकता में वृद्धि: सीपीआरआई शिमला में बंगाल में रोगमुक्त बीज और तकनीक के उपयोग पर विशेष मंथन

पश्चिम बंगाल में आलू की खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) शिमला में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें उन्नत तकनीकों और रोगमुक्त बीजों के उपयोग पर गहन चर्चा हुई।

A
Ankit Yadav
06 सित 2026, 17:09
आलू उत्पादकता में वृद्धि: सीपीआरआई शिमला में बंगाल में रोगमुक्त बीज और तकनीक के उपयोग पर विशेष मंथन
भारतीय कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से लैस करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) में पश्चिम बंगाल राज्य के लिए विशेष रूप से मंथन किया गया है। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल में आलू की कुल पैदावार और गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार करना है। वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य के किसानों को यदि आधुनिक तकनीकी संसाधन और उच्च कोटि के रोगमुक्त बीज उपलब्ध कराए जाएं, तो उत्पादकता के आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकती है। इस दिशा में विभिन्न शोध प्रस्तावों और उनकी मैदानी क्रियान्वयन रणनीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया ताकि किसानों की आमदनी को भी सुदृढ़ किया जा सके।

कृषि तकनीक और उन्नत बीजों का महत्व

पारंपरिक कृषि पद्धतियों के मुकाबले आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने से फसलों में बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। पश्चिम बंगाल देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में शुमार है, लेकिन समय-समय पर फंगस, वायरस और अन्य संक्रमणों के कारण फसल को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। सीपीआरआई शिमला के वैज्ञानिकों का मुख्य जोर ऐसे रोगमुक्त बीजों के विकास और उनके वितरण पर है जो प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर पैदावार देने में सक्षम हों। संस्थान के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बीज की गुणवत्ता उत्कृष्ट होगी, तो पौधों का शुरुआती विकास स्वस्थ होगा, जिससे अंततः बाजार में मिलने वाली उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होगा। आधुनिक कृषि उपकरणों, ड्रिप इरिगेशन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट जैसी तकनीकों के साथ-साथ स्मार्ट फार्मिंग के तरीकों को भी इस योजना में शामिल करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। पश्चिम बंगाल के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रकार की बीजों की किस्मों को तैयार करने पर भी बल दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय मिट्टी और तापमान के अनुकूल सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त किए जा सकें। कृषि वैज्ञानिकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसानों को समय पर वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि वे इन नई तकनीकों का सही ढंग से उपयोग कर सकें और अपनी फसल की पूरी क्षमता का दोहन कर सकें।

भविष्य की योजनाएं और किसानों को लाभ

इस उच्च स्तरीय मंथन के बाद अब ज़मीनी स्तर पर इन योजनाओं को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। राज्य के कृषि विभागों के साथ मिलकर वैज्ञानिकों की टीमें विभिन्न जिलों में जागरूकता अभियान चलाएंगी और किसानों को रोगमुक्त बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएंगी। इस पूरी प्रक्रिया का दीर्घकालिक उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को बाजार में उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है। आने वाले महीनों में इस तकनीक आधारित बदलाव के सकारात्मक परिणाम देखने को मिलने की पूरी उम्मीद है, जिससे पश्चिम बंगाल के आलू किसानों को एक नई दिशा मिलेगी।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज