इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में भारी उछाल
भारत में इंटरनेट के उपयोग का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जून महीने के समापन तक देश में इंटरनेट उपभोक्ताओं का कुल आंकड़ा 111 करोड़ 41 लाख के स्तर को पार कर गया है। यदि हम मार्च 2026 के अंत तक की स्थिति पर नजर डालें, तो उस समय यह संख्या लगभग 109 करोड़ 28 लाख थी। इस प्रकार, केवल एक तिमाही के भीतर इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के आधार में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है। इस वृद्धि दर में तिमाही आधार पर 96 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है, जो देश में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। यह आंकड़ा ब्रॉडबैंड और नैरोबैंड दोनों प्रकार के इंटरनेट कनेक्शनों को मिलाकर तैयार किया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में इंटरनेट की पहुंच बढ़ने से यह संख्या आने वाले समय में और अधिक बढ़ने की संभावना है, क्योंकि लोग अब सूचना और सेवाओं के लिए डिजिटल माध्यमों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।
वायर्ड और वायरलेस इंटरनेट का विस्तृत वर्गीकरण
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण द्वारा जारी प्रदर्शन संकेतक रिपोर्ट में इंटरनेट उपभोक्ताओं का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। कुल 111 करोड़ 41 लाख इंटरनेट ग्राहकों में से 4 करोड़ 70 लाख से अधिक लोग वायर्ड यानी तार के माध्यम से इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। वहीं, वायरलेस इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 106 करोड़ 64 लाख तक पहुंच गई है। रिपोर्ट के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि ब्रॉडबैंड इंटरनेट ग्राहकों की संख्या में जून 2026 के अंत तक 2.03 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, नैरोबैंड इंटरनेट कनेक्शनों के ग्राहकों की संख्या में 0.89 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि उपयोगकर्ता अब तेज गति वाली ब्रॉडबैंड सेवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूरसंचार क्षेत्र में यह तकनीकी परिवर्तन देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आम जनता को बेहतर इंटरनेट अनुभव मिल सके।
टेली-डेंसिटी और दूरसंचार सेवाओं का व्यापक विस्तार
इंटरनेट के अलावा, भारत में टेलीफोन ग्राहकों की संख्या में भी निरंतर बढ़ोतरी देखी जा रही है। मार्च 2026 के अंत में टेलीफोन ग्राहकों की संख्या लगभग 133 करोड़ थी, जो जून 2026 के अंत तक बढ़कर 134 करोड़ के आंकड़े को छू गई है। यह वृद्धि तिमाही आधार पर 1.31 प्रतिशत की दर को दर्शाती है। इसके साथ ही, देश की कुल टेली-डेंसिटी यानी प्रति सौ व्यक्तियों पर टेलीफोन कनेक्शन की उपलब्धता में भी सुधार हुआ है। मार्च 2026 के अंत में यह दर 93.26 प्रतिशत थी, जो जून 2026 के अंत तक बढ़कर 94.31 प्रतिशत हो गई है। दूरसंचार क्षेत्र में यह निरंतर प्रगति देश के संचार तंत्र के सुदृढ़ीकरण का संकेत देती है। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि न केवल इंटरनेट बल्कि पारंपरिक टेलीफोन सेवाओं का दायरा भी देश भर में फैल रहा है। सरकार और दूरसंचार प्रदाता कंपनियों के प्रयास अब अधिक से अधिक लोगों को मुख्यधारा की डिजिटल संचार सेवाओं से जोड़ने पर केंद्रित हैं।