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मेक इन इंडिया का ऐतिहासिक मील का पत्थर: देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब स्वदेशी रूप से निर्मित

देश के तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है, जिसके तहत उपयोग में आने वाले 99.2% मोबाइल फोन भारत में ही बने हैं।

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Kantap News डेस्क
17 अग 2026, 11:56
मेक इन इंडिया का ऐतिहासिक मील का पत्थर: देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब स्वदेशी रूप से निर्मित
प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान ने एक और अद्भुत सफलता का कीर्तिमान स्थापित किया है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश के बाजारों में और नागरिकों के हाथों में उपयोग होने वाले कुल मोबाइल फोन में से अब 99.2 प्रतिशत फोन पूरी तरह से भारत के भीतर ही निर्मित किए गए हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पिछले कुछ वर्षों में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र कितनी तेजी से फले-फूले है और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत हब के रूप में उभरा है। कभी आयात पर भारी निर्भरता रखने वाला देश आज न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी मोबाइल फोन का बड़े पैमाने पर निर्यात कर रहा है।

विनिर्माण हब के रूप में भारत का उदय

देश में ग्लोबल ब्रांड्स के साथ-साथ घरेलू कंपनियों ने भी प्लांट स्थापित करने में भारी निवेश किया है, जिसके परिणामस्वरूप रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हुए हैं। सरकार द्वारा दी गई पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजनाओं ने इस पूरी प्रक्रिया को गति देने में उत्प्रेरक का काम किया है। विश्व स्तरीय कलपुर्जे और तकनीक अब देश के भीतर ही विकसित किए जा रहे हैं, जिससे लागत में कमी आई है और उत्पादों की गुणवत्ता भी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा आने वाले समय में सौ प्रतिशत के आंकड़े को भी पार कर जाएगा क्योंकि देश में चिप डिजाइनिंग और सेमीकंडक्टर निर्माण पर भी तेजी से काम शुरू हो चुका है।

आर्थिक प्रभाव और भविष्य की राह

इस शानदार उपलब्धि से देश के चालू खाते के घाटे को कम करने में बहुत बड़ी मदद मिली है और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। छोटे शहरों के युवाओं और महिलाओं को इन विनिर्माण इकाइयों में रोजगार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। सरकार का अगला लक्ष्य भारत को केवल मोबाइल निर्माण तक सीमित न रखकर संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का वैश्विक सिरमौर बनाना है, जिसके लिए नीतियां और बुनियादी ढांचा लगातार मजबूत किया जा रहा है।
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