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नया दूरसंचार नियम: 1 नवंबर 2026 से टेलीकॉम कंपनियों को दिखाना होगा कॉलर का केवाईसी नाम

दूरसंचार क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। आगामी 1 नवंबर 2026 से सभी प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटरों को कॉलर का केवाईसी रजिस्टर्ड नाम दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे मोबाइल उपभोक्ताओं को आने वाली कॉल्स के दौरान अधिक पारदर्शिता और सुरक्षा मिलेगी।

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Ankit Yadav
15 अक्ट 2026, 14:45
नया दूरसंचार नियम: 1 नवंबर 2026 से टेलीकॉम कंपनियों को दिखाना होगा कॉलर का केवाईसी नाम

दूरसंचार कंपनियों के लिए नया निर्देश जारी

देश में मोबाइल उपभोक्ताओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक नया नियम लागू किया जा रहा है। इस नए नियम के तहत आगामी 1 नवंबर 2026 से देश की सभी प्रमुख दूरसंचार कंपनियों को अपनी सेवाओं के माध्यम से कॉलर का असली नाम दिखाना होगा। यह नाम वही होगा जो उस सिम कार्ड धारक ने अपने केवाईसी दस्तावेजों में दर्ज कराया है। इस व्यवस्था के दायरे में एयरटेल, वोडाफोन आइडिया यानी वीआई, रिलायंस जियो और सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल जैसी सभी प्रमुख कंपनियां शामिल की गई हैं। इन सभी कंपनियों को अपने नेटवर्क पर आने वाली कॉल्स के दौरान स्क्रीन पर कॉलर का यह प्रमाणित नाम प्रदर्शित करने की तकनीकी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इस बदलाव से मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले आम नागरिकों को सीधे तौर पर यह पता चल सकेगा कि उन्हें फोन करने वाला व्यक्ति कौन है और उसका आधिकारिक नाम क्या है। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य डिजिटल धोखाधड़ी और फर्जी कॉल्स पर लगाम कसना है ताकि उपभोक्ता सुरक्षित रह सकें।

केवाईसी आधारित पहचान प्रणाली का क्रियान्वयन

मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं के लिए यह नई व्यवस्था तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जब भी कोई नागरिक किसी अन्य व्यक्ति को फोन करेगा, तो रिसीवर के मोबाइल फोन की स्क्रीन पर वह नाम दिखाई देगा जो मोबाइल कनेक्शन लेते समय पहचान पत्र और दस्तावेजों में दिया गया था। टेलीकॉम कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सिस्टम में दर्ज केवाईसी डेटा और कॉलर आईडी डिस्प्ले के बीच पूरी तरह तालमेल बना रहे। इस प्रक्रिया के लागू होने से स्पैम कॉल्स भेजने वालों और धोखाधड़ी करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान करना बहुत आसान हो जाएगा। अभी तक कई बार लोगों को अनजान नंबरों से फर्जी कॉल्स या वित्तीय धोखाधड़ी के संदेश मिलते थे, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब इस नई व्यवस्था के जरिए कॉलर के असली नाम की जानकारी मिलने से लोग खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें किस कॉल का जवाब देना है और किसे नजरअंदाज करना है। एयरटेल, वीआई, जियो और बीएसएनएल जैसी सभी सेवा प्रदाता कंपनियों को इस तय समयसीमा के भीतर अपने साफ्टवेयर और नेटवर्क में आवश्यक तकनीकी बदलाव पूरे करने होंगे ताकि यह सेवा सुचारू रूप से काम कर सके।

उपभोक्ताओं को मिलने वाले संभावित लाभ

इस नए नियम के लागू होने से देश के करोड़ों मोबाइल फोन उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। तकनीकी जानकारों और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, कॉलर का केवाईसी रजिस्टर्ड नाम सामने आने से अनजान नंबरों से होने वाले अपराधों में उल्लेखनीय कमी आएगी। डिजिटल युग में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिनमें जालसाज अक्सर फर्जी नामों से रजिस्टर्ड सिम कार्ड का इस्तेमाल करके भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। जब फोन स्क्रीन पर ही कॉलर का वास्तविक नाम दिखाई देने लगेगा, तब ऐसे धोखेबाजों के लिए छिपना और लोगों को गुमराह करना बेहद कठिन हो जाएगा। इसके अलावा, आम उपभोक्ताओं को अनावश्यक प्रचार कॉल और परेशान करने वाले संदेशों से भी बड़ी राहत मिलने की संभावना है। लोग बिना किसी डर के अपने फोन का इस्तेमाल कर सकेंगे क्योंकि उन्हें कॉलिंग के दौरान ही यह स्पष्ट जानकारी मिल जाएगी कि कॉल करने वाला अधिकृत व्यक्ति कौन है। आगामी 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होने वाले इस कदम को देश के दूरसंचार विनियामक ढांचे में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार माना जा रहा है।

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