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नया जोखिम: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंपनियों पर आरबीआई की नजर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश के वित्तीय क्षेत्र, बैंकों और यूपीआई जैसे डिजिटल भुगतान तंत्रों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनियों से पैदा होने वाले नए खतरों और चुनौतियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
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Ankit Yadav
11 सित 2026, 11:57
भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने हाल ही में देश के बैंकिंग ढांचे और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के सामने खड़े होने वाले संभावित जोखिमों पर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है। इस बार केंद्रीय बैंक का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक प्रदान करने वाली कंपनियों और क्लाउड सेवा प्रदाताओं पर है। लखनऊ से लेकर देश के तमाम बड़े वित्तीय केंद्रों में इस बात पर गहन चर्चा शुरू हो चुकी है कि डिजिटल युग में तकनीक पर बढ़ती निर्भरता किस प्रकार बैंकों और यूपीआई तंत्र के लिए सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर सकती है। वर्तमान समय में देश के भीतर और बाहर जिस प्रकार वित्तीय लेनदेन डिजिटल माध्यमों से हो रहे हैं, उसमें तकनीकी कंपनियों का दखल बहुत अधिक बढ़ चुका है।
डिजिटल भुगतान और बैंकिंग पर मंडराता तकनीकी साया
पारंपरिक बैंकिंग का स्वरूप अब तेजी से बदल रहा है और यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म हमारी दैनिक जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में, यदि इन सेवाओं को संचालित करने वाले क्लाउड सर्वर या एआई एल्गोरिदम में किसी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी आती है या साइबर हमला होता है, तो पूरा का पूरा वित्तीय तंत्र कुछ ही पलों में ठप हो सकता है। लखनऊ के वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बात को भली-भांति समझ रहा है कि यदि वित्तीय संस्थानों का डेटा कुछ चुनिंदा बड़ी टेक कंपनियों के क्लाउड स्टोरेज पर निर्भर रहेगा, तो नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है। इसी वजह से आरबीआई अब इन बाहरी और तकनीकी संस्थाओं के कामकाज को अधिक कड़े नियमों के दायरे में लाने पर विचार कर रहा है ताकि आम जनता की गाढ़ी कमाई और बैंकिंग डेटा पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग आज के समय में केवल ग्राहक सेवा यानी चैटबॉट्स तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि धोखाधड़ी का पता लगाने, ऋण स्वीकृति देने और जोखिम के आकलन जैसे बेहद संवेदनशील कार्यों में भी इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। जब इतने बड़े पैमाने पर निर्णय एआई सिस्टम्स के हवाले किए जाते हैं, तो उनके गलत परिणाम आने या उनमें पक्षपातपूर्ण कोडिंग होने का खतरा भी बढ़ जाता है। आरबीआई इस बात की गहराई से समीक्षा कर रहा है कि इन आधुनिक तकनीकों के कारण बैंकों की आंतरिक सुरक्षा पर क्या असर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंक वित्तीय क्षेत्र के लिए कुछ कड़े दिशा-निर्देश या नए नियम जारी कर सकता है, जिससे इन तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही को और अधिक सुनिश्चित किया जा सके।