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टेक्नोलॉजी

रियल-टाइम एआई मॉडल: टावस ने पेश किया वीडियो बातचीत के लिए नया ग्रिफिन मॉडल

टावस कंपनी ने ग्रिफिन नाम का एक नया कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल पेश किया है। यह मॉडल आम चैटबॉट की तरह केवल लिखकर जवाब नहीं देता है। यह वीडियो कॉल के दौरान आमने-सामने की बातचीत करने में पूरी तरह सक्षम है।

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Ankit Yadav
04 अक्ट 2026, 14:07
रियल-टाइम एआई मॉडल: टावस ने पेश किया वीडियो बातचीत के लिए नया ग्रिफिन मॉडल

टेक्नोलॉजी की दुनिया में नया कदम

टावस नामक कंपनी ने तकनीकी दुनिया में एक बड़ा कदम उठाते हुए ग्रिफिन नामक आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल को दुनिया के सामने रखा है। इस मॉडल को विशेष रूप से वास्तविक समय की वीडियो बातचीत करने के लिए डिजाइन किया गया है ताकि उपयोगकर्ता स्क्रीन पर आमने-सामने संवाद का अनुभव प्राप्त कर सकें। कंपनी इसे दुनिया का पहला ह्यूमन इंटरेक्शन मॉडल कह रही है जो पारंपरिक चैटबॉट की सीमाओं से परे जाता है। पुराने सिस्टम केवल टाइप किए गए पाठ्य सवालों को पढ़कर जवाब देते थे लेकिन यह नया मॉडल सीधे तौर पर आमने-सामने के संवाद को संभालता है। इसे बनाने वाली संस्था ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसका एक लाइव वीडियो भी साझा किया है। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि यह मॉडल बिना किसी रुकावट के लोगों के सवालों के जवाब दे रहा है। बातचीत के दौरान इसके चेहरे के भाव और हाथों के इशारे पूरी तरह स्वाभाविक प्रतीत होते हैं। इस वीडियो को देखने के बाद पहली नजर में यह पहचान पाना बेहद कठिन हो जाता है कि सामने वाला व्यक्ति कोई असली इंसान है या फिर एक कंप्यूटर प्रोग्राम। यह तकनीक वीडियो संचार के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की पूरी क्षमता रखती है। आम उपयोगकर्ता इस तकनीक की मदद से भविष्य में बेहद स्वाभाविक वीडियो कॉल का आनंद उठा सकेंगे।

आधुनिक तकनीक और परीक्षण के आंकड़े

इस नए सिस्टम की कार्यप्रणाली इंसानों जैसी आवाज और चेहरे के हाव-भाव को आपस में जोड़ने पर आधारित है। यह आपकी बोली गई आवाज को सुन सकता है और सामने वाले के विजुअल इशारों को भी आसानी से देख सकता है। इसके बाद यह बिल्कुल इंसानों की तरह अपनी आवाज और शारीरिक भाषा का इस्तेमाल करके जवाब देता है। कंपनी के अनुसार इस मॉडल ने वीडियो ट्यूरिंग टेस्ट को सफलतापूर्वक पास कर लिया है जो अपने आप में एक बड़ा कीर्तिमान है। इसके साथ लाइव बातचीत करने वाले कुल अडतालीस प्रतिशत लोगों को यह लगा था कि वे किसी असली इंसान से बात कर रहे हैं। इससे पहले के पुराने सिस्टम इस मामले में तीन प्रतिशत से भी कम सफलता दर हासिल कर पाए थे। यह मॉडल एनवीडिया के फुल-डुप्लेक्स एआई वीडियो बेंचमार्क पर पहले स्थान पर बना हुआ है। कंपनी के अनुसार यह मॉडल बातचीत के दौरान हो रही हर गतिविधि को लगातार प्रोसेस करता रहता है। इसी निरंतर प्रक्रिया के कारण यह बातचीत के बीच में होने वाली रुकावटों और आवाज के उतार-चढ़ाव को भांप लेता है। यह मॉडल तुरंत ही सभी प्रकार के दृश्य और श्रव्य संकेतों को समझकर अपनी प्रतिक्रिया देता है। हालांकि अभी तक इस नए टूल का स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक परीक्षण नहीं किया गया है। फिर भी इसके शुरुआती प्रदर्शन के आंकड़े तकनीकी जगत में काफी चर्चा का विषय बने हुए हैं और लोग इसकी क्षमताओं से काफी प्रभावित नजर आ रहे हैं।

भविष्य की योजनाएं और उपलब्धता

फिलहाल टावस कंपनी ने इस ग्रिफिन मॉडल को आम जनता के लिए पूरी तरह से रोलआउट नहीं किया है। कंपनी का साफ कहना है कि इस शक्तिशाली तकनीक को हर किसी के लिए उपलब्ध कराने से पहले सुरक्षा और डेटा प्रकटीकरण से जुड़े पहलुओं पर काम करना जरूरी है। कंपनी सुरक्षा मानकों को पूरी तरह सुनिश्चित करने के बाद ही इसे व्यापक स्तर पर जारी करने की योजना बना रही है। हालांकि डेवलपर्स और चुनिंदा टेस्टर्स के लिए शुरुआती टेस्टिंग हेतु इसका ग्रिफिन-लाइट संस्करण अर्ली एक्सेस के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सीमित पहुंच के जरिए कंपनी को इसके प्रदर्शन में सुधार करने और संभावित कमियों को दूर करने में मदद मिल रही है। आने वाले समय में जैसे-जैसे इसके सुरक्षा फीचर्स और डिस्क्लोजर पुख्ता होंगे इसके सार्वजनिक रूप से आने की उम्मीद बढ़ जाएगी। तकनीक प्रेमियों और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की इस नए मॉडल पर गहरी नजर बनी हुई है क्योंकि यह वीडियो कॉलिंग के पारंपरिक तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदल सकता है। इस प्रकार की उन्नत तकनीक के आने से भविष्य में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आभासी सहायक प्रणालियों का दायरा काफी हद तक फैल जाएगा। कंपनी इस अत्याधुनिक तकनीक को पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

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