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सेमिकॉन 2.0 की तैयारी: पांच वर्षों में देश में चिप इंडस्ट्री की होगी शुरुआत

भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र को गति देने के लिए सेमिकॉन 2.0 योजना के तहत अगले पांच वर्षों में देश के भीतर ही चिप उद्योग की शुरुआत करने की बड़ी रूपरेखा तैयार की है।

A
Ankit Yadav
20 सित 2026, 10:38
सेमिकॉन 2.0 की तैयारी: पांच वर्षों में देश में चिप इंडस्ट्री की होगी शुरुआत

भारतीय प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने 'सेमिकॉन 2.0' योजना का अगला व्यापक खाका प्रस्तुत किया है। इसके तहत अगले पांच वर्षों के भीतर देश की घरेलू भूमि पर अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप इंडस्ट्री के पूर्ण संचालन और उत्पादन की शुरुआत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश को वैश्विक सप्लाई चेन का एक प्रमुख केंद्र बनाना है, ताकि विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ऑटोमोबाइल और रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सके। इस पूरी कार्ययोजना के अंतर्गत बुनियादी ढांचे के विकास, अत्याधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण और घरेलू व विदेशी निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इस नई पहल की पृष्ठभूमि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर चिप्स की भारी कमी और सप्लाई चेन में आए व्यवधानों से जुड़ी हुई है, जिसने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया था। सरकार ने पहले ही सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम के पहले चरण के जरिए देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की नींव रखने का प्रयास किया था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। उसी अनुभव और सीख को आधार बनाते हुए अब 'सेमिकॉन 2.0' को अधिक व्यावहारिक, उन्नत और भविष्य की जरूरतों के अनुकूल तैयार किया गया है। इस चरण में केवल असेंबली और पैकेजिंग तक सीमित न रहकर, फैब्रिकेशन यूनिट्स यानी वेफर निर्माण जैसी जटिल और उच्च-तकनीकी प्रक्रियाओं को भी देश के भीतर स्थापित करने पर केंद्रित योजना बनाई गई है, जिससे भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर मैप पर अपनी मजबूत स्थिति दर्ज करा सके।

इस योजना के धरातल पर उतरने से देश के तकनीकी और औद्योगिक परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है, जिसमें रोजगार के लाखों नए अवसरों के सृजन के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पांच साल के इस निर्धारित समय-सीमा के भीतर चिप निर्माण इकाइयां पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देती हैं, तो भारत सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिक वाहनों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में उभर सकता है। इसके अलावा, वैश्विक तकनीकी दिग्गज कंपनियों का भारत की ओर रुख करना इस बात का संकेत है कि देश में कुशल श्रम और विशाल बाजार की उपलब्धता निवेशकों को आकर्षित कर रही है। आने वाले दिनों में इस योजना के तहत कई नई कंपनियों के आने और बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

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