सरकार ला रही नया रोडमैप
देश के भीतर खुद के मोबाइल फोन ब्रांड विकसित करने की योजना अब निर्णायक चरण की तरफ बढ़ रही है। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार अगले करीब एक महीने के भीतर भारतीय ब्रांडों के लिए एक विशेष रोडमैप सार्वजनिक कर सकती है। इस प्रस्तावित कार्ययोजना का मुख्य आधार देश के भीतर मोबाइल विनिर्माण के क्षेत्र में अब तक हासिल की गई उपलब्धियां होंगी। इस दिशा में भारत ने आवश्यक तकनीकी क्षमता पूरी तरह से हासिल कर ली है जिसे देखकर देशवासियों को गौरवान्वित महसूस होना तय माना जा रहा है। सरकार की इस आगामी पहल के तहत बाजार में तीन से चार नई निजी कंपनियों के अपने स्वदेशी मोबाइल ब्रांड उतर सकते हैं। इन सभी आगामी घरेलू उपकरणों की शुरुआत सबसे पहले एंड्रॉयड ऑपरेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए होने की पूरी संभावना जताई गई है। आने वाले कुछ महीनों में भारतीय उपभोक्ताओं को देश में तैयार किए गए इन नए ब्रांडों के स्मार्टफोन खरीदने के लिए उपलब्ध मिलेंगे जो सीधे तौर पर विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर देने का माद्दा रखेंगे।
तीन चरणों में पूरी हुई तैयारी
मोबाइल फोन के निर्माण की इस पूरी प्रक्रिया को क्रमिक रूप से तीन महत्वपूर्ण चरणों में विभाजित किया गया है। सबसे पहले शुरुआती दौर में देश के भीतर फोन को असेंबल करने की तकनीक और क्षमता का सफलतापूर्वक विकास किया गया था। इसके बाद अगले चरण में आवश्यक कलपुर्जों के निर्माण के लिए एक मजबूत और व्यापक इकोसिस्टम तैयार करने पर पूरा जोर दिया गया। वर्तमान समय में इस विशाल कंपोनेंट इकोसिस्टम के अंतर्गत लगभग चार से पांच सौ छोटी और बड़ी कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं। इस नेटवर्क की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल भारत ने चीन जैसे देश को पैंतीस हजार करोड़ रुपये के इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे निर्यात किए थे। निर्माण प्रक्रिया का तीसरा और अंतिम चरण स्मार्टफोन के डिजाइन से जुड़ा हुआ है जिसमें इलेक्ट्रिकल डिजाइन, मैकेनिकल डिजाइन और एस्थेटिक या इंडस्ट्रियल डिजाइन जैसी तीन मुख्य विधाएं शामिल हैं। देश के तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों को इस उच्चस्तरीय डिजाइन क्षमता को पूरी तरह से विकसित करने में लगभग दो साल का लंबा समय लगा है।
तीन साल पहले रखी थी नींव
इस पूरी महत्वकांक्षी परियोजना की मजबूत नींव करीब तीन साल पहले देश में मजबूत कंपोनेंट इकोसिस्टम की स्थापना के साथ पड़ी थी। उस शुरुआती समय में सरकार का पूरा ध्यान मोबाइल उपकरणों के लिए जरूरी कलपुर्जों का एक घरेलू नेटवर्क तैयार करने पर केंद्रित था। आज वही शुरुआती प्रयास रंग ला रहा है क्योंकि घरेलू गतिविधियां केवल स्थानीय जरूरतों को पूरा करने तक ही अब सीमित नहीं रह गई हैं। भारत अब अपने तैयार उत्पादों और कलपुर्जों को दूसरे देशों को भी बड़े पैमाने पर निर्यात कर रहा है। असेंबली और कंपोनेंट निर्माण के बाद अब डिजाइन क्षमता हासिल कर लेने के बाद अपना खुद का फोन ब्रांड तैयार करने का सही समय आ गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार का यह प्रस्तावित रोडमैप लागू कर दिया जाता है तो भारतीय बाजार का परिदृश्य पूरी तरह से बदल जाएगा। घरेलू स्तर पर विकसित होने वाले इन नए ब्रांडों से देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को एक अभूतपूर्व गति मिलेगी और बाजार में विकल्प भी बढ़ेंगे।