बस्ती मंडल में आधुनिक जांच केंद्र
बस्ती मंडल के अंतर्गत आने वाले तीन प्रमुख जिलों बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर में अब वाहनों की तकनीकी फिटनेस जांच के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य वाहनों की जांच प्रक्रिया को पूरी तरह से स्वचालित और त्रुटिहीन बनाना है। शासन की ओर से निर्धारित की गई नई नीति के अनुसार, तीनों जिलों में कम से कम दो-दो अत्याधुनिक केंद्र खोलने की विस्तृत योजना तैयार की गई है। यह कदम प्रदेश में वाहनों की तकनीकी फिटनेस जांच व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से अब वाहनों के फिटनेस प्रमाणन के लिए चालकों को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त एक डिजिटल और सटीक प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। परिवहन विभाग इस नई पहल के माध्यम से मंडल के तीनों जिलों में यातायात सुरक्षा मानकों को और अधिक सुदृढ़ करना चाहता है जिससे पुराने और अनफिट वाहनों की पहचान बेहतर तरीके से हो सकेगी।
पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया
ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की मान्यता, विनियमन और नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य नीति-2026 लागू की है। इच्छुक आवेदक जो अपने क्षेत्र में इन केंद्रों को स्थापित करना चाहते हैं, उनके लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा 12 अक्तूबर को दोपहर 12 बजे से उपलब्ध कराई जाएगी। परिवहन प्रशासन के अनुसार, आवेदकों को अपना पंजीकरण निर्धारित वेब पोर्टल के माध्यम से ही पूरा करना होगा। इन केंद्रों के लिए पंजीकरण प्राधिकारी के रूप में उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त को नियुक्त किया गया है, जो पूरी प्रक्रिया की देखरेख करेंगे। आवेदन प्रक्रिया में पात्रता के आधार पर प्रमाणपत्र पहले आओ और पहले पाओ की नीति पर जारी किए जाएंगे। इस पूरी प्रणाली का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, तेज और पूरी तरह से ऑनलाइन रखना है ताकि किसी भी तरह की विसंगति की कोई गुंजाइश न रहे और योग्य आवेदक समय पर अपना स्टेशन शुरू कर सकें।
योजना का दायरा और महत्व
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित इस नई राज्य नीति का लाभ पूरे राज्य के 36 जिलों को पहले चरण में मिलेगा, जिसमें बस्ती मंडल के तीनों जिले शामिल हैं। इस योजना का मुख्य जोर वाहनों की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच सुनिश्चित करना है ताकि सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके। ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों के माध्यम से फिटनेस जांच पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित होगी, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। यह पहल न केवल वाहनों के फिटनेस परीक्षण को आधुनिक बनाएगी बल्कि परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली में भी एक नई पारदर्शिता लाएगी। जो भी व्यक्ति या संस्था इन केंद्रों को स्थापित करने का इच्छुक है, उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। इस पहल के क्रियान्वयन से भविष्य में इन जिलों में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के साथ-साथ वाहनों की फिटनेस की स्थिति पर भी सटीक निगरानी रखी जा सकेगी। यह कदम प्रदेश के परिवहन ढांचे को डिजिटल इंडिया के अनुरूप ढालने की एक कड़ी है।