ग्लोबल फोरम में दिया गया बयान
टाटा संस के चेयरमैन एन। चंद्रशेखरन ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 के दौरान दुनिया भर के दिग्गजों के सामने देश की संभावनाओं को रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में सेमीकंडक्टर भारतीय राष्ट्र के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण साबित होंगे। इस मंच पर उन्होंने बताया कि एक सौ साठ साल पुराना टाटा समूह उन क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहता है जिनकी बुनियादी जरूरत देश के भीतर ही सबसे ज्यादा है। उनके अनुसार कुशल प्रतिभाओं की उपलब्धता और मजबूत स्थानीय बाजार के चलते देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बड़ी जिम्मेदारी संभालने की पूरी क्षमता रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक के इस दौर में विभिन्न देशों और वैश्विक कंपनियों के साथ मिलकर काम करना बेहद अनिवार्य हो गया है। ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकताओं पर पैनी नजर रखना भी इस दिशा में एक जरूरी कदम है ताकि भविष्य की चुनौतियों से समय रहते निपटा जा सके।
टाटा समूह की बड़ी परियोजनाएं
टाटा समूह की अनुषंगी इकाई टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन के सहयोग से काम कर रही है। गुजरात के धोलेरा में लगभग 91,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश के साथ एक उन्नत चिप निर्माण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस प्रस्तावित कारखाने में तैयार होने वाली चिप्स का उपयोग मोटर वाहन निर्माण, मोबाइल फोन, विभिन्न उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाएगा। इसके अलावा असम राज्य में भी लगभग 27,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है जहां एक आधुनिक सेमीकंडक्टर असेंबली और जांच इकाई विकसित की जा रही है। इन तमाम बड़ी पहलों का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर लगातार बढ़ रही मांग को समय पर पूरा करना है। साथ ही इसके जरिए वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तंत्र के साथ देश के जुड़ाव को और अधिक मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
रणनीतिक विजन और भविष्य की दिशा
सेमीकंडक्टर सेक्टर में यह बड़ा विस्तार उन्नत विनिर्माण और बैटरी प्रौद्योगिकियों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की टाटा समूह की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। चेयरमैन ने इस बात पर जोर दिया कि सबसे उन्नत तकनीकों को अपनाने से पहले बाजार की वास्तविक मांग और आर्थिक व्यवहार्यता का सही आकलन किया जाना चाहिए। बिना सोचे-समझे केवल दो नैनोमीटर चिप बनाने की घोषणा करने से जमीनी स्तर पर सफलता नहीं मिल सकती है क्योंकि मांग के आंकड़ों को देखना सबसे जरूरी है। हाल ही में बोर्डरूम में चल रही चर्चाओं के बीच उन्हें टाटा संस के चेयरमैन के रूप में पांच साल का तीसरा कार्यकाल सौंपा गया है। वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा की उपलब्धता और कार्यक्षमता जैसी कई चीजें पूरी तरह तय हैं जिन पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। समूह का यह मानना है कि देश में दीर्घकालिक रोजगार के टिकाऊ अवसर पैदा करने वाले निवेश ही व्यावसायिक रूप से सबसे अधिक सफल साबित होंगे।