वाशिंगटन स्थित अमरीकी सीनेट ने रूस के खिलाफ आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक नया प्रतिबंध विधेयक पारित कर दिया है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र, बैंकिंग प्रणाली और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन को और अधिक सीमित करना है। विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि जो देश या विदेशी कंपनियां रूस के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बड़े व्यापारिक सौदे जारी रखेंगी, उन पर द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) और अतिरिक्त आयात शुल्क लागू किए जा सकते हैं।
सीनेट में बिल पारित होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल, उर्वरकों और औद्योगिक धातुओं की कीमतों में उथल-पुथल मच सकती है। उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों के अनुसार विभिन्न देशों से व्यापार करती हैं। अमरीकी प्रशासन का तर्क है कि ये प्रतिबंध वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं।
वैश्विक स्तर पर कई देशों ने अमरीका के इस एकतरफा कदम पर ध्यान केंद्रित किया है। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और जी20 बैठकों में इस प्रतिबंध कानून के प्रभाव पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। विभिन्न देश अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, मुद्रा विनिमय प्रणालियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को इस तरह के भू-राजनीतिक झटकों से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यापार तंत्र विकसित करने पर तेजी से काम कर रहे हैं।