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बड़ा कूटनीतिक बदलाव: बांग्लादेश ने शेख हसीना कार्यकाल के 101 भारतीय समझौतों की समीक्षा शुरू की
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल के दौरान भारत के साथ हुए 101 समझौतों और ज्ञापनों की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया कूटनीतिक मोड़ आ गया है।
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Ankit Yadav
12 सित 2026, 11:19
पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में अब ढाका प्रशासन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ संपन्न हुए कुल 101 समझौतों की गहन छानबीन शुरू की है। इन करारों में बुनियादी ढांचे के विकास, ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा जैसे कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं, जो दोनों पड़ोसी देशों के आपसी सहयोग की रीढ़ माने जाते रहे हैं।
द्विपक्षीय संबंधों पर असर
नई समीक्षा प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह आकलन करना है कि क्या ये समझौते देश के दीर्घकालिक हितों के अनुकूल हैं या नहीं। नई अंतरिम व्यवस्था के आने के बाद से भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक समीकरणों में कई तरह के उतार-चढ़ाव आए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इन पुराने करारों का पुनर्मूल्यांकन दोनों तरफ के रणनीतिक रिश्तों पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि भारत इस क्षेत्र में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने पर जोर देता रहा है।
पूर्ववर्ती हसीना सरकार के दौरान दोनों देशों ने कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। वर्तमान समीक्षा के दायरे में मुख्य रूप से वे परियोजनाएं आ रही हैं जो या तो निर्माणाधीन हैं या फिर जिन्हें हाल के वर्षों में गति दी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी और राष्ट्रीय हित आधारित दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए सभी पहलुओं की कानूनी और आर्थिक रूप से जांच की जा रही है।
लखनऊ और देश के अन्य हिस्सों में भी इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर गहरी नजर रखी जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की सीमाएं नेपाल और बिहार के रास्ते पूर्वी क्षेत्र से जुड़ी हैं और यहां के व्यापारिक समुदाय पर भी इसका परोक्ष प्रभाव पड़ सकता है। क्षेत्रीय कूटनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में इन समझौतों की समीक्षा के नतीजे दोनों देशों के भविष्य के आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की दिशा तय करेंगे।
भारत सरकार ने हमेशा से बांग्लादेश के साथ मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्राथमिकता दी है, लेकिन इस ताजा घटनाक्रम के बाद नई दिल्ली की तरफ से भी कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना जताई जा रही है। दोनों देशों के राजनयिक इस स्थिति को संभालने के लिए लगातार संवाद के रास्ते तलाश रहे हैं ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास किसी भी तरह से प्रभावित न हो।