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भीषण आपदा: नेपाल में बाढ़ से 939 मौतें और बिश्केक में पीएम मोदी का एससीओ संबोधन
पड़ोसी देश नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जहाँ बाढ़ के कारण अब तक 939 लोगों की जान जा चुकी है। दूसरी ओर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान क्षेत्र में कूटनीतिक मोर्चे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिश्केक में आयोजित होने वाले 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करने के लिए तैयार हैं।
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Ankit Yadav
01 सित 2026, 17:06
पड़ोसी देश नेपाल इस समय एक गंभीर और अभूतपूर्व मानवीय संकट से जूझ रहा है। लगातार भारी मानसूनी बारिश और उसके बाद आई भयंकर बाढ़ ने देश के विभिन्न हिस्सों में भारी तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। आधिकारिक और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से अब तक कुल 939 लोगों की जान जा चुकी है। अनगिनत परिवार बेघर हो चुके हैं और कई इलाकों में बुनियादी ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। सरकार और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सहायता, साफ पानी और भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और एससीओ शिखर सम्मेलन
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा के तहत किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुँच रहे हैं। यहाँ वे 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इस वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और आर्थिक विकास जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होने की पूरी उम्मीद है। एससीओ के सदस्य देशों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ यूरेशियन क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए यह सम्मेलन एक अहम पड़ाव साबित होगा। दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बड़े मंच से भारत क्षेत्रीय चुनौतियों और वैश्विक मंच पर अपने दृष्टिकोण को किस प्रकार सामने रखता है।
आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय कूटनीति के इन दो अलग-अलग मोर्चों पर एक ही दिन खबरें सामने आना यह रेखांकित करता है कि पड़ोसी देशों के साथ हमारे रिश्ते कितने गहरे और संवेदनशील हैं। एक तरफ जहाँ नेपाल के साथ मानवीय और द्विपक्षीय संवेदनशीलता जुड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर मध्य एशिया के साथ रणनीतिक साझेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नेपाल में बाढ़ के कारण हुई मौतों ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन प्रणालियों को बेहतर बनाने की तत्काल आवश्यकता को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए दक्षिण एशियाई देशों को मिलकर एक मजबूत रणनीतिक ढांचा तैयार करना होगा।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नेपाल सरकार इस आपदा से उबरने के लिए किस प्रकार की दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं को लागू करती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट की घड़ी में किस हद तक मदद का हाथ बढ़ाता है। साथ ही, बिश्केक में होने वाले एससीओ सम्मेलन के बाद क्षेत्रीय कूटनीति में किस तरह के नए समीकरण उभरते हैं, इस पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर बनी रहेगी। दोनों ही घटनाएँ इस सप्ताह के सबसे बड़े समाचारों के रूप में अंतरराष्ट्रीय पटल पर छाई हुई हैं।