अंतरराष्ट्रीय नियमों और वियना कन्वेंशन का हवाला देते हुए नई दिल्ली ने स्लोवेनिया के समक्ष राजनयिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की चूक को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, हाल ही में सामने आई सुरक्षा संबंधी कुछ चिंताओं के बाद यह कड़ा संदेश सीधे तौर पर संबंधित देश के राजनयिक माध्यमों से पहुंचाया गया है। भारत ने दो टूक शब्दों में यह स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत विदेशी राजनयिकों और उनके कार्यालयों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करना स्थानीय प्रशासन की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है, जिस पर किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान कूटनीतिक दायरे में इस तरह के सख्त संदेश अमूमन तब दिए जाते हैं जब सुरक्षा मानकों या प्रोटोकॉल के पालन में गंभीर लापरवाही देखने को मिलती है। भारत ने उम्मीद जताई है कि स्लोवेनियाई प्रशासन इस मामले की गंभीरता को समझते हुए भविष्य में ऐसे किसी भी घटनाक्रम की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाएगा। देश के विदेश मंत्रालय ने हमेशा से इस बात पर जोर दिया है कि दुनिया भर में भारतीय राजनयिकों और मिशनों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
द्विपक्षीय संबंधों पर असर हालांकि इस कड़े रुख के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद के रास्ते खुले हुए हैं, लेकिन भारत ने अपनी प्राथमिकताओं को बहुत ही स्पष्ट तरीके से रख दिया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की स्पष्ट और दृढ़ प्रतिक्रियाएं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती हुई कूटनीतिक ताकत और अपने हितों के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।