कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
'मराठा आरक्षण आंदोलन रोकने के लिए 500 करोड़ दे रहे थे', जरांगे पाटिल ने लगाया आरोप; शिंदे ने किया इनकार      रिलायंस की रिफाइनरी में रुबियो का जोरदार स्वागत, अंबानी संग कई अहम मुद्दों पर हुई बात      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      ‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या      यूं ही नहीं फ्रांस से भारत तक हो रहे दंगे-प्रदर्शन, 13 देशों के 101 संगठनों का सीक्रेट नेटवर्क कर रहा काम      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!      दिल्‍ली नगर निगम में विकास निधि-प्रदूषण पर AAP का हंगामा, पार्षदों में हाथापाई की नौबत; मेयर को सुरक्षित निकाला     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
विदेश

प्रलय का खतरा: तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर और विशाल झीलों से मंडरा रहा बड़ा संकट

जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों और उनके मलबे के बीच बन रही विशालकाय झीलों के कारण एक बार फिर ग्लेशियल लेक आउटर्स्ट फ्लड यानी GLOF का खतरा गहराता जा रहा है, जिससे पर्वतीय इलाकों में भारी तबाही की आशंका बढ़ गई है।

A
Ankit Yadav
24 अग 2026, 16:09
प्रलय का खतरा: तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर और विशाल झीलों से मंडरा रहा बड़ा संकट
हिमालयी क्षेत्रों और अन्य पर्वतीय शृंखलाओं में ग्लोबल वार्मिंग का असर अब बेहद खतरनाक रूपों में सामने आने लगा है। तापमान में निरंतर हो रही वृद्धि के चलते ऊंचे पहाड़ों पर मौजूद ग्लेशियर बहुत तीव्र गति से पिघल रहे हैं। इन ग्लेशियरों के पीछे हटने और पिघलने से पर्वतीय ढलानों के बीच बड़े पैमाने पर पानी जमा हो रहा है, जिससे विशालकाय झीलों का निर्माण हो रहा है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के लिए यह स्थिति अत्यधिक चिंता का विषय बनती जा रही है, क्योंकि ये नई झीलें प्राकृतिक रूप से बहुत अधिक स्थिर नहीं होती हैं और इनके किनारों पर मौजूद मलबे या बर्फ की दीवारें कभी भी टूट सकती हैं।

ग्लेशियल लेक आउटर्स्ट फ्लड का बढ़ता जोखिम

जब इन अस्थिर झीलों में जलस्तर अपनी क्षमता से अधिक हो जाता है या फिर भूस्खलन और भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं के कारण इनकी प्राकृतिक दीवारें ढह जाती हैं, तो अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की घाटियों में बहने लगता है। इस जानलेवा घटना को ग्लेशियल लेक आउटर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है। इस प्रकार की आपदा आने पर निचले इलाकों में कुछ ही पलों में प्रलयकारी सैलाब आ जाता है, जो अपने रास्ते में आने वाले पुलों, सड़कों, मकानों और पनबिजली परियोजनाओं को नेस्तनाबूद कर देता है। इतिहास में भी कई बार ऐसी घटनाओं के कारण भारी जनधन की हानि हो चुकी है, और वर्तमान में जिस रफ्तार से झीलों का आकार बढ़ रहा है, उससे खतरा और अधिक गंभीर हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय इलाकों में अनियोजित विकास, वनों की कटाई और लगातार बढ़ रहा तापमान इस स्थिति को और अधिक बदतर बना रहे हैं। यदि समय रहते इन संवेदनशील झीलों की मॉनिटरिंग और जल निकास के लिए वैज्ञानिक उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में इसके परिणाम विनाशकारी साबित हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी इस दिशा में कड़ी चौकसी बरतने की आवश्यकता है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। आम जनता और नीति निर्माताओं के बीच इस गंभीर विषय पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है कि क्या हम वास्तव में किसी बड़ी पर्यावरणीय प्रलय की ओर बढ़ रहे हैं। पृथ्वी के बढ़ते तापमान पर अंकुश लगाने और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। यदि प्रकृति के इस चेतावनी संकेत को नजरअंदाज किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज