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कृषि संकट पर आक्रोश: भारत-अमेरिका समझौते के खिलाफ महासभा का जोरदार धरना

किसानों की विभिन्न समस्याओं और भारत-अमेरिका कृषि समझौते के विरोध में महासभा की ओर से एक बड़ा धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें सिंचाई के लिए बिजली और बंद नलकूपों समेत कई अहम मुद्दों पर आवाज उठाई गई।

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Ankit Yadav
01 सित 2026, 19:48
कृषि संकट पर आक्रोश: भारत-अमेरिका समझौते के खिलाफ महासभा का जोरदार धरना
देशभर में अन्नदाताओं की दुर्दशा और उनकी बढ़ती कठिनाइयों के बीच विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार जारी है। इसी क्रम में हाल ही में एक प्रमुख महासभा की तरफ से जोरदार धरना दिया गया, जहां किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य किसानों के हितों को प्रभावित करने वाले नीतिगत फैसलों का विरोध करना था, जिसमें सबसे प्रमुख मुद्दा हालिया भारत-अमेरिका कृषि समझौता रहा। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय समझौतों से घरेलू कृषि क्षेत्र और खासकर छोटे किसानों की आजीविका पर भारी संकट आ सकता है।

सिंचाई और बिजली की गंभीर समस्याएं

किसानों ने धरना स्थल पर स्पष्ट किया कि आज ग्रामीण इलाकों में कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे की हालत बेहद दयनीय होती जा रही है। खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण फसलें समय पर सींचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, लंबे समय से बंद पड़े नलकूपों को दोबारा शुरू करने की दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इन तमाम प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों की वजह से किसानों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन उनकी उपज का उचित मूल्य बाजार में नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे आर्थिक तंगी के दलदल में फंसते जा रहे हैं। सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि कृषि देश की रीढ़ है और इसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि वे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रभावों का पुनर्विचार करें और स्थानीय स्तर पर किसानों को मिलने वाली सब्सिडी तथा सुविधाओं को सुदृढ़ करें। इस प्रदर्शन के माध्यम से स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें बंद पड़े नलकूपों को तत्काल प्रभाव से चालू करने और सिंचाई के लिए निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से रखी गई। किसान संगठनों का कहना है कि वे अपनी हक की लड़ाई के लिए लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष जारी रखेंगे और जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल जाता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन विभिन्न स्तरों पर अनवरत रूप से चलता रहेगा।
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