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हरित ऊर्जा विस्तार: हरियाणा को मिलेंगी चार नई संपीडित बायोगैस और अपशिष्ट से ऊर्जा परियोजनाएं

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की है कि हरियाणा राज्य को जल्द ही चार नई एकीकृत संपीडित बायोगैस (सीबीजी) और अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने वाली परियोजनाएं मिलेंगी, जिससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत बढ़ावा मिलेगा।

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Ankit Yadav
31 अग 2026, 14:05
हरित ऊर्जा विस्तार: हरियाणा को मिलेंगी चार नई संपीडित बायोगैस और अपशिष्ट से ऊर्जा परियोजनाएं
हरियाणा राज्य के बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने चार नई और उन्नत परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में इसकी आधिकारिक घोषणा की है। इन नई पहलों के तहत राज्य में चार एकीकृत संपीडित बायोगैस (सीबीजी) और कचरे से ऊर्जा उत्पन्न करने वाले संयंत्रों का निर्माण किया जाएगा। यह कदम न केवल राज्य की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने और कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। इस दिशा में प्रशासन और ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गजों के बीच कई दौर की बैठकों के बाद रूपरेखा तैयार की गई है।

हरित ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन का संगम

हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसी कड़ी में हरियाणा को यह बड़ी सौगात मिली है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार लगातार वैकल्पिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दे रही है। संपीडित बायोगैस (सीबीजी) परियोजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होती हैं क्योंकि इनमें कृषि अपशिष्ट और गोबर जैसे जैविक कचरे का उपयोग ईंधन बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने वाली इकाइयां शहरी क्षेत्रों में तेजी से विकराल होती कचरे की समस्या का स्थायी समाधान प्रदान करेंगी। इन चार नई परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को भी बढ़ावा मिलेगा। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से हरियाणा में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की भी पूरी संभावना है। संयंत्रों के निर्माण से लेकर उनके संचालन और रखरखाव तक तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। इसके साथ ही, स्थानीय किसानों को भी अपने कृषि अवशेषों का उचित उपयोग करने का एक नया माध्यम मिलेगा, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। सरकार का यह प्रयास सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को मजबूत करता है, जहां कचरे को संसाधन में बदला जाता है। आने वाले दिनों में इन परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन और प्रशासनिक औपचारिकताओं को तेजी से पूरा किए जाने की उम्मीद है। संबंधित विभाग और अधिकारी इस योजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के मार्गदर्शन में इन पहलों के शुरू होने से हरियाणा देश के अन्य राज्यों के लिए हरित विकास का एक आदर्श उदाहरण बन सकता है। जैसे-जैसे कार्य आगे बढ़ेगा, राज्य के विभिन्न जिलों में स्वच्छ ऊर्जा और स्वच्छता के मोर्चे पर इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
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