पीयू महंगा होने से कारोबार पर सीधा असर
वर्तमान समय में आगरा के जूता उद्योग से जुड़े कारोबारियों को कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय बाजार में पॉलीयूरेथेन यानी पीयू की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। इसक सीधा असर जूते के विभिन्न कलपुर्जे और सोल तैयार करने वाली इकाइयों पर पड़ रहा है। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि लागत बढ़ने से पूरा उत्पादन चक्र गड़बड़ा गया है। छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए इस बढ़े हुए खर्च को संभालना बहुत कठिन होता जा रहा है। जूते के सोल और अन्य हिस्सों में इस्तेमाल होने वाले इस अहम रसायन के महंगे होने से उत्पादित माल की कुल लागत काफी ऊपर चली गई है। इस स्थिति के चलते बाजार में तैयार माल के दाम और मांग के बीच संतुलन बिगड़ता जा रहा है। कारखानों में काम करने वाले कारीगरों से लेकर अंतिम बिक्री करने वाले दुकानदारों तक हर कोई इस आर्थिक दबाव को महसूस कर रहा है। उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ने से स्थानीय स्तर पर काम की रफ्तार भी धीमी होने लगी है।
कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें और चुनौतियां
लागत बढ़ने के बाद भी बाजार में जूते के घटकों के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं, जिससे मुनाफा लगातार घटता जा रहा है। व्यापारियों का तर्क है कि पीयू की ऊंची कीमतों के कारण उन्हें अपने उत्पाद पुराने दामों पर बेचना मुश्किल हो रहा है। यदि वे दाम बढ़ाते हैं तो ग्राहक दूसरे विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इस असमंजस की स्थिति ने शहर के औद्योगिक क्षेत्र में एक तरह का ठहराव पैदा कर दिया है। कई छोटी इकाइयों ने तो अपनी उत्पादन क्षमता को भी घटा दिया है ताकि घाटे से बचा जा सके। कच्चे माल की सप्लाय करने वाली फर्मों और जूता निर्माताओं के बीच भी कीमतों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं लेकिन कोई ठोस समाधान अभी तक सामने नहीं आया है। इस समस्या के कारण स्थानीय स्तर पर पूंजी का प्रवाह भी प्रभावित हुआ है। निर्माताओं के सामने समय पर अपने कर्मचारियों को भुगतान करने और बैंक ऋण चुकाने का संकट भी मंडराने लगा है। प्रशासनिक स्तर पर या उद्योग संघों के माध्यम से इस विषय पर लगातार मंथन चल रहा है ताकि इस मंदी जैसी स्थिति से किसी तरह से निपटा जा सके और उद्योग को बचाया जा सके।
जूता उद्योग की पृष्ठभूमि और इसका महत्व
ऐतिहासिक रूप से आगरा देश के सबसे बड़े जूता निर्माण और निर्यात केंद्रों में से एक माना जाता है। यहाँ तैयार होने वाले जूते और उनके विभिन्न कलपुर्जे देश के कोने-कोने के अलावा विदेशों में भी भेजे जाते हैं। इस उद्योग से शहर के लाखों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि कच्चा माल जैसे कि पीयू महंगा होता है, तो उसका असर पूरे क्षेत्रीय अर्थतंत्र पर बहुत गहरे रूप से पड़ता है। पृष्ठभूमि के लिहाज से देखें तो जूता उद्योग हमेशा से ही वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील रहा है। रासायनिक उत्पादों की कीमतों में होने वाला फेरबदल सीधे तौर पर इस पारंपरिक व्यापार के मुनाफे को तय करता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लागत वृद्धि यदि लंबे समय तक बनी रही, तो यह शहर के इस प्रमुख व्यापार की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कमजोर कर सकती है। आने वाले दिनों में यदि इन आवश्यक सामग्रियों की कीमतें सामान्य नहीं होती हैं, तो इस क्षेत्र की कई इकाइयों को स्थायी रूप से बंद होने का खतरा भी उठाना पड़ सकता है।