डोनाल्ड ट्रंप का रूस से डीजल खरीदने का ऐलान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 अक्तूबर को एक बड़ा ऐलान करते हुए सभी को चौंका दिया। उन्होंने घोषणा की कि वह रूस से डीजल खरीदने की एक डील कर चुके हैं। इस समझौते के तहत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी हर दिन भारी मात्रा में डीजल की आपूर्ति करने पर अपनी सहमति दे दी है। पिछले दो सालों से यूरोपीय देश रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाकर उसे कमजोर करने की लगातार कोशिश कर रहे थे। अमेरिका के नेतृत्व में टैरिफ और पाबंदियों के जरिए रूस को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अलग-थलग करने का प्रयास किया जा रहा था। लेकिन जैसे ही अमेरिका को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की आवश्यकता महसूस हुई, राष्ट्रपति ट्रंप अपने पुराने रुख से पूरी तरह पलट गए। उन्होंने पुतिन के साथ सीधे डीजल का सौदा कर लिया और इस निर्णय को पूरी तरह से अमेरिका के राष्ट्रीय हित में बताया। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने यह फैसला अमेरिकी नागरिकों की भलाई और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस अचानक हुए समझौते ने यूरोपीय देशों को एक बड़ा झटका दिया है जो लंबे समय से रूसी तेल और ऊर्जा उत्पादों का विरोध करते आ रहे थे।
वैश्विक ऊर्जा संकट और होर्मुज बंद होने का असर
वर्तमान समय में होर्मुज के पूरी तरह बंद हो जाने की वजह से दुनिया भर के देश एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। हालांकि अमेरिका खुद तेल का एक बहुत बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन घरेलू स्तर पर कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए वैश्विक आपूर्ति का बढ़ना बहुत जरूरी है। अमेरिका एक ट्रक प्रधान देश है जहाँ एक जगह से दूसरी जगह तक सामान की आवाजाही के लिए ट्रकों का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। ऐसे हालात में डीजल और ईंधन की बढ़ती हुई कीमतें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती हैं। देश में नवंबर महीने में मिडटर्म इलेक्शन नजदीक आ रहे हैं जिसके कारण प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शुरुआत में ट्रंप इन तमाम समस्याओं को अपनी बातों से नकारते रहे थे, लेकिन बाद में जमीनी हकीकत बदल गई। ईरान युद्ध के कुछ ही घंटों या हफ्तों में खत्म होने की उम्मीद थी जो गलत साबित हुई और वेनेजुएला की तरह ईरान में भी स्थिति काफी बिगड़ गई। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं और ट्रंप के पास रूस के अलावा कोई अन्य व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा। अपने पिछले दो सालों के कड़े संघर्ष और प्रतिबंधों की नीतियों को किनारे रखते हुए उन्होंने अंततः रूस के साथ डीजल की यह डील पक्की कर ली।
विदेश मंत्री एस जयशंकर का रुख और भारत की नीति
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से ही भारत सरकार ने रूसी तेल की खरीद को लेकर अपना रुख हमेशा से पूरी तरह स्पष्ट रखा है। भारत ने मॉस्को से लगातार तेल का आयात जारी रखकर अमेरिका और यूरोप को यह कड़ा संदेश दिया कि देश अपने नागरिकों के हितों के साथ कभी समझौता नहीं करेगा। व्यापारिक नियमों के हिसाब से जहां भी बेहतर डील मिलेगी, वहीं से ऊर्जा उत्पादों की खरीद की जाएगी। भारत के इस फैसले से नाराज होकर अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर 25 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ ठोक दिया था। इसके बावजूद भारत सरकार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने मार्ग पर अडिग बनी रही। यहाँ तक कि अमेरिकी विदेश मंत्री ने खुद भारत आकर जामनगर में तेल डील करने की कोशिश की थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में जोर देकर कहा कि आज की दुनिया की वास्तविकता यह है कि हालात लगातार बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुराने दिनों की तुलना वर्तमान समय से नहीं की जा सकती और ऊर्जा से लेकर वित्त तक हर क्षेत्र में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। इस बंधक जैसी स्थिति में हर देश कई विकल्पों पर काम कर रहा है और कोई भी केवल एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहना चाहता। जयशंकर के अनुसार यह सब इस बात का प्रमाण है कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना कितना जरूरी है और भारत का सही समय पर लिया गया निर्णय बिल्कुल सही साबित हुआ है।