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रक्षा और सुरक्षा

आपदा प्रबंधन: चमोली में स्थापित होगा देश का पहला ग्लेशियल लेक अर्ली वार्निंग सिस्टम

उत्तराखंड के संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र चमोली में ग्लेशियर टूटने और झीलों के फटने से होने वाली तबाही को रोकने के लिए पहला अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया जा रहा है। यह प्रणाली निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को किसी भी संभावित बाढ़ की जानकारी समय पूर्व दे देगी।

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Ankit Yadav
30 सित 2026, 11:59
आपदा प्रबंधन: चमोली में स्थापित होगा देश का पहला ग्लेशियल लेक अर्ली वार्निंग सिस्टम

उच्च हिमालयी झीलों की 24 घंटे उपग्रह निगरानी

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में यह परियोजना शुरू की जा रही है। प्रणाली के अंतर्गत उच्च ऊंचाई पर स्थित संवेदनशील हिमनद झीलों पर स्वचालित जल स्तर सेंसर, मौसम केंद्र और हाई-रेजोल्यूशन कैमरे स्थापित किए जाएंगे। ये सभी उपकरण सीधे उपग्रह संचार नेटवर्क से जुड़े रहेंगे और किसी भी असामान्य हलचल पर तुरंत सिग्नल भेजेंगे।

सायरन और मोबाइल अलर्ट से तुरंत मिलेगी सूचना

यदि किसी झील में पानी का दबाव अचानक बढ़ता है या बांध टूटने के संकेत मिलते हैं, तो यह सिस्टम स्वतः ही निचले इलाकों में लगे आपातकालीन सायरन बजा देगा। इसके साथ ही नदी तटों पर बसे गांवों के निवासियों और प्रशासनिक अधिकारियों के मोबाइल फोन पर तत्काल अलर्ट संदेश पहुंच जाएगा। इससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए महत्वपूर्ण समय मिल सकेगा।

ऋषिगंगा और केदारनाथ त्रासदियों से सबक

पूर्व में 2013 और 2021 में हुई भयंकर जल त्रासदियों के बाद वैज्ञानिक समुदाय लंबे समय से हिमालयी क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली की मांग कर रहा था। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और नई खतरनाक झीलें बन रही हैं। चमोली में सफल क्रियान्वयन के बाद इस मॉडल को राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

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