पड़ाव चौराहे से हटाया गया अतिक्रमण
काशी में आगामी 22, 24 और 25 अक्टूबर को एयर शो आयोजित किया जाना है। इस बड़े आयोजन के दौरान शहर में भारी भीड़ जुटने की संभावना है और यातायात पूरी तरह सुगम बना रहे। इसी को ध्यान में रखते हुए रविवार को वाराणसी और चंदौली के जिला प्रशासन के साथ ही लोक निर्माण विभाग ने एक संयुक्त और विशेष अभियान चलाया। वाराणसी लोक निर्माण विभाग ने पड़ाव चौराहे से लेकर अवधूत भगवान राम घाट की तरफ जाने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग पर सख्त कार्रवाई की। इस प्रमुख मार्ग पर लंबे समय से किए गए अवैध कब्जों और निर्माण कार्यों को बुलडोजर और अन्य मशीनों की मदद से पूरी तरह साफ कराया गया। सुजाबाद बंधा मोड़ के बिलकुल समीप सड़क के किनारे वर्षों से बसी हुई धरकार बस्ती को भी प्रशासन द्वारा पूरी तरह हटवा दिया गया। इस कार्रवाई से मार्ग के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर जगह खाली हो गई और यातायात के लिए रास्ता सुगम हो गया।
जेसीबी की गर्जना से खुद हटी झुग्गियां
सड़क किनारे बनी धरकार बस्ती को हटाने के लिए प्रशासनिक अमले के साथ जेसीबी मशीनें मौके पर पहुंची थीं। जैसे ही मौके पर जेसीबी की भारी गर्जना गूंजी, धरकार समाज के लोग स्वयं ही अपनी झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने में जुट गए। इसके तुरंत बाद सड़क के दोनों तरफ विशेष रूप से सफाई अभियान चलाया गया और जेसीबी की मदद से जमीन का समतलीकरण कराया गया। ऐसा करने से उस प्रमुख मार्ग की चौड़ाई में उल्लेखनीय वृद्धि हो गई है। दूसरी तरफ चंदौली जिला प्रशासन की टीम भी पूरी मुस्तैदी के साथ सक्रिय रही। चंदौली प्रशासन की ओर से पड़ाव-बहादुरपुर मार्ग पर स्थित पोलाव शहीद मजार के पास रविवार की सुबह ही हजारों की संख्या में महिला और पुरुष सफाईकर्मी हाथों में झाड़ू लेकर सड़क पर उतर आए। पोलाव शहीद मजार से लेकर सती घाट तक के पूरे इलाके में सड़क और नाले की व्यापक सफाई की गई। इस दौरान भारी मात्रा में जमा हुए कूड़े-कचरे को वहां से पूरी तरह हटवा दिया गया ताकि आगामी एयर शो के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
बस्ती उजड़ने से रोजी-रोटी का संकट
सड़क किनारे से बस्ती हटाए जाने के बाद अब धरकार समाज के सामने अपनी आजीविका और रोजी-रोटी को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इसी सड़क के किनारे अपना जीवनयापन करते आ रहे हैं और यहीं रहकर अपनी जीविका चलाते हैं। अपनी इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने शासन और प्रशासन के समक्ष गांव में रहने के लिए वैकल्पिक जगह देने की मांग कई बार उठाई थी। परंतु बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी इस मांग पर किसी ने कोई सुनवाई नहीं की जिससे उनकी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं। अब जबकि उनकी बस्तियां पूरी तरह उजड़ चुकी हैं, उनके सामने जीवनयापन करने का बड़ा संकट पैदा हो गया है। प्रशासन की इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यातायात व्यवस्था काफी हद तक सुधर जाएगी। हालांकि विस्थापित हुए गरीब परिवारों के पुनर्वास को लेकर अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और स्थानीय लोगों में इसको लेकर गहरी चिंता बनी हुई है।