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आसमान में युद्धाभ्यास: जयपुर और पश्चिमी राजस्थान में वायुसेना का 17 दिवसीय मेगा एयर शो

भारतीय वायुसेना द्वारा जयपुर और पश्चिमी राजस्थान के आसमान में एक बड़े हवाई अभ्यास की तैयारी शुरू कर दी गई है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में सत्रह दिनों का नॉटम जारी किया गया है।

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Ankit Yadav
07 सित 2026, 17:11
आसमान में युद्धाभ्यास: जयपुर और पश्चिमी राजस्थान में वायुसेना का 17 दिवसीय मेगा एयर शो
भारतीय वायुसेना देश की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने तथा अपने सैनिकों को आधुनिक युद्ध कौशल में प्रशिक्षित करने के लिए लगातार बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास का आयोजन करती रहती है। इसी कड़ी में अब राजस्थान के सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले पश्चिमी हिस्से और राजधानी जयपुर के आसमान में एक बहुत बड़ा हवाई अभ्यास आयोजित किया जाने वाला है। इस अभ्यास को लेकर रक्षा मंत्रालय और वायुसेना मुख्यालय द्वारा सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि अभ्यास के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े।

सत्रह दिनों का विशेष नॉटम जारी

इस आगामी बड़े सैन्य अभ्यास के मद्देनजर विमानन क्षेत्र के लिए एक विशेष नॉटम यानी नोटिस टू एयरमेन जारी कर दिया गया है जो कुल सत्रह दिनों तक पूरी तरह से प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान संबंधित हवाई क्षेत्र में सामान्य नागरिक विमानों की आवाजाही को लेकर विशेष दिशा-निर्देश और रूट डायवर्जन लागू किए जा सकते हैं ताकि वायुसेना के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और अन्य सैन्य हेलिकॉप्टर सुरक्षित रूप से अपनी कलाबाजियों और सामरिक अभ्यासों को अंजाम दे सकें। पश्चिमी राजस्थान का यह पूरा क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सैन्य अभ्यासों के लिए हमेशा से ही अत्यंत अनुकूल माना जाता रहा है और यहां अक्सर बड़े स्तर पर युद्धाभ्यास देखने को मिलते हैं। वायुसेना के इस मेगा अभ्यास में देश के अलग-अलग एयरबेस से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और विभिन्न मारक क्षमताओं से लैस ड्रोन भी हिस्सा ले सकते हैं। इस दौरान रात के समय भी उड़ान भरने और हवा में ही ईंधन भरने जैसी जटिल रणनीतिक प्रक्रियाओं का अभ्यास किए जाने की पूरी संभावना है। भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे आयोजन पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेंगे ताकि सभी निर्धारित सैन्य उद्देश्यों को पूरी तरह से और सुरक्षित तरीके से हासिल किया जा सके। इस प्रकार के युद्धाभ्यास से न केवल पायलटों का अनुभव बढ़ता है बल्कि देश की वायु रक्षा प्रणाली की ताकत का भी जमीनी स्तर पर आकलन होता है।

स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के लिए निर्देश

चूंकि यह हवाई अभ्यास काफी बड़े पैमाने पर होने जा रहा है, इसलिए स्थानीय जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को भी पहले ही सतर्क कर दिया गया है। आम नागरिकों से यह अपील की जा सकती है कि वे अभ्यास के दौरान जारी किए जाने वाले सुरक्षा नियमों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करें और प्रतिबंधित क्षेत्रों के आसपास अनावश्यक रूप से भीड़ न जुटाएं। इस सत्रह दिवसीय युद्धाभ्यास से जुड़ी तमाम गतिविधियों पर रक्षा जानकारों की भी गहरी नजर है, क्योंकि यह अभ्यास भारतीय वायुसेना की भविष्य की रणनीतिक तैयारियों और उसकी युद्धक दक्षता को परखने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने वाला है।
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