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ट्रेनें रद्द: पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ने से 7 सितंबर को बिहार की 10 ट्रेनें रहेंगी बंद
बिहार में लगातार बढ़ते जलस्तर और बाढ़ जैसे हालातों के बीच रेलवे यातायात पर भी बड़ा असर देखने को मिल रहा है। पुनपुन नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने और खतरे के निशान के करीब पहुंचने की वजह से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के तहत रेल ब्रिज को बंद कर दिया गया है। इसके चलते आगामी 7 सितंबर को राज्य से गुजरने वाली और यहां संचालित होने वाली कुल 10 महत्वपूर्ण ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
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Ankit Yadav
07 सित 2026, 16:14
बिहार के कई जिलों में भारी मानसूनी बारिश और नदियों के उफान पर होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। इसी कड़ी में अब परिवहन व्यवस्था पर भी मौसम की मार साफ दिखाई दे रही है। रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुनपुन नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक ऊपर आ गया है, जिससे नदी पर बने रेल ब्रिज की संरचना पर भारी दबाव पड़ सकता है। किसी भी संभावित बड़े हादसे को टालने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से इस रेल पुल पर आवाजाही रोक दी है और इसे आगामी आदेशों तक बंद कर दिया गया है।
यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें, कई रूट्स पर संचालन ठप
पुल बंद किए जाने के कारण रेलवे बोर्ड और स्थानीय जोन ने आगामी 7 सितंबर को संचालित होने वाली कुल 10 ट्रेनों के पहिए थामने का ऐलान किया है। इन ट्रेनों के रद्द होने से रोजाना सफर करने वाले दैनिक यात्रियों, व्यापारियों और दूर-दराज की यात्रा करने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ जमा होने लगी है और लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों की तलाश करने में जुट गए हैं। हालांकि, रेलवे विभाग की ओर से यात्रियों को हो रही असुविधा को कम करने के लिए लगातार सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं और संबंधित स्टेशनों पर हेल्प डेस्क भी एक्टिव कर दिए गए हैं ताकि लोगों को सही समय पर अपडेट मिल सके।
टिकट रिफंड और वैकल्पिक व्यवस्था पर जोर
जिन यात्रियों ने 7 सितंबर के लिए इन रद्द की गई ट्रेनों में अपने रिजर्वेशन करा रखे थे, वे रेलवे नियमों के अनुसार अपना पूरा टिकट रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए रेलवे ने काउंटर और ऑनलाइन माध्यमों पर प्रक्रिया को सुगम बना दिया है ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की अतिरिक्त परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं और स्थिति सामान्य होने तथा नदी का जलस्तर घटने के बाद ही ब्रिज की तकनीकी जांच कराकर ट्रेनों के संचालन को दोबारा शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग हाई अलर्ट पर
इस बीच राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। नदियों के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि से केवल रेलमार्ग ही नहीं, बल्कि सड़क मार्ग और आसपास की बस्तियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रशासनिक अमला संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रहा है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों या रेलवे पुलों के आसपास जाने से बचें। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की जान से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है, और जैसे ही मौसम और नदियों का जलस्तर अनुकूल होगा, रेल सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल कर दिया जाएगा।