नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के दौरान आपातकालीन राहत और सहायता के लिए स्थापित किए गए पीएम केयर्स फंड (PM CARES Fund) की नवीनतम वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस फंड में मिलने वाले वार्षिक दान (अंशदान) और इसके द्वारा किए जाने वाले कुल खर्च दोनों में महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई है।
वित्तीय रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
चंदे (दान) में भारी गिरावट: महामारी के शुरुआती और चरम दौर में इस फंड को देश और विदेश से रिकॉर्ड मात्रा में स्वैच्छिक योगदान और कॉरपोरेट दान मिला था। हालांकि, अब आम नागरिकों और व्यावसायिक घरानों द्वारा दिए जाने वाले दान का ग्राफ काफी नीचे आ गया है।
खर्च के आंकड़ों में कमी: महामारी के दौरान वेंटिलेटर, ऑक्सीजन प्लांट, वैक्सीन निर्माण और प्रवासियों की सहायता पर बड़ी धनराशि खर्च की गई थी। इसके विपरीत, अब सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े नियमित और सीमित प्रोजेक्ट्स पर ही बजट का आवंटन किया जा रहा है।
शेष धनराशि (कैरी-फॉरवर्ड): रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती वर्षों में प्राप्त हुए बड़े दान के कारण फंड के बैंक खातों में अभी भी पर्याप्त धनराशि सुरक्षित है। इस बची हुई राशि को ब्याज और सावधि जमा (FD) के माध्यम से सुरक्षित रखा गया है।
पीएम केयर्स फंड का ढांचा और उद्देश्य
स्थापना और उद्देश्य: पीएम केयर्स फंड (Prime Minister's Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) की स्थापना वर्ष 2020 में एक समर्पित राष्ट्रीय कोष के रूप में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी आपदा, महामारी या संकटपूर्ण स्थिति से निपटना और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना है।
प्रशासनिक ढांचा: देश के प्रधानमंत्री इस ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman) होते हैं, जबकि केंद्रीय रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके पदेन ट्रस्टी के रूप में शामिल हैं।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकालीन दौर के बाद अब इस फंड की गतिविधियां सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही हैं, जिससे इसके वित्तीय लेन-देन और खर्च के स्वरूप में यह बदलाव आया है।