Lucknow Desk : रक्षाबंधन का त्योहार इस बार उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं के लिए सिर्फ खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का अवसर भी बन रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 5,000 महिलाएं आकर्षक और आधुनिक डिजाइनों वाली राखियां तैयार कर रही हैं। खास बात यह है कि इन राखियों को अब केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि डिजिटल माध्यमों के जरिए देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दे रहा है। मिशन की ओर से महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री और ब्रांडिंग को बढ़ावा देने के लिए ई-सरस समेत विभिन्न ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया जा रहा है। स्थानीय हुनर को मिला ऑनलाइन बाजार मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना अभियान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ग्रामीण क्षेत्र में तैयार होने वाले उत्पाद अब स्थानीय खरीदारों से आगे निकलकर व्यापक उपभोक्ता बाजार तक पहुंच रहे हैं।
वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मिर्जापुर, अयोध्या, बाराबंकी, सीतापुर, कानपुर, आगरा, बरेली, झांसी, फर्रुखाबाद और नोएडा समेत कई जिलों में महिलाएं राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों में पारंपरिक कला के साथ आधुनिक डिजाइन और स्थानीय शिल्प की झलक देखने को मिल रही है। राखी से बढ़ रहा महिलाओं का आत्मविश्वास रक्षाबंधन जैसे त्योहार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर लेकर आते हैं। राखी निर्माण के जरिए महिलाएं अपने पारंपरिक कौशल को छोटे कारोबार में बदल रही हैं। ऑनलाइन बिक्री ने इस काम को और व्यापक बना दिया है। ई-सरस और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की उपलब्धता से महिलाओं को ग्राहकों की पसंद समझने, मांग के अनुरूप डिजाइन तैयार करने और अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने का अनुभव मिल रहा है। इसके साथ ही पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार में अलग पहचान मिल सके।
उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक बढ़ी भागीदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को केवल उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रखना चाहता। उन्हें पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बिक्री और विपणन जैसे कारोबार के महत्वपूर्ण पहलुओं से भी जोड़ा जा रहा है। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं धीरे-धीरे उत्पादनकर्ता के साथ-साथ उद्यमी की भूमिका में भी आगे बढ़ रही हैं। मिशन निदेशक अरुण कुमार का कहना है कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार गुणवत्तापूर्ण उत्पादों में बड़े बाजार तक पहुंचने की पर्याप्त क्षमता है। डिजिटल माध्यम इस क्षमता को उपभोक्ताओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस रक्षाबंधन इन महिलाओं की बनाई राखियां भाई-बहन के रिश्ते की डोर को मजबूत करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता का संदेश भी देंगी। त्योहार की बढ़ती मांग के बीच इन महिलाओं के लिए राखी निर्माण अपने हुनर को स्थायी आय और उद्यमिता में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।