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देश-दुनिया ब्रेकिंग

ईरान की अर्थव्यवस्था पर युद्ध और अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव, महंगाई 66 प्रतिशत तक पहुंची; होर्मुज संकट से दुनिया चिंतित

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का आर्थिक असर अब और गहरा होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकाबंदी के बीच ईरान में महंगाई और व्यापारिक दबाव बढ़ा है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है।

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Ankit Yadav
29 अग 2026, 13:44
ईरान की अर्थव्यवस्था पर युद्ध और अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव, महंगाई 66 प्रतिशत तक पहुंची; होर्मुज संकट से दुनिया चिंतित

ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका के साथ जारी युद्ध और कड़े होते प्रतिबंधों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान के राष्ट्रपति ने बताया है कि देश के विदेशी व्यापार में करीब 35 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि महंगाई दर 66 प्रतिशत तक पहुंच गई है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंध लगाए गए हैं और रणनीतिक क्षेत्रों में कारोबार करने वाली संस्थाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। इस स्थिति का असर केवल ईरान की घरेलू अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार बाजार भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और यहां से होने वाले समुद्री व्यापार में किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। ईरान का दावा है कि वह इस रणनीतिक मार्ग पर नियंत्रण बनाए हुए है, जबकि अमेरिका और अन्य देशों की ओर से इसकी पहुंच और सुरक्षा को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। तनाव के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही में कमी आने की खबरें भी सामने आई हैं। ऊर्जा बाजार पहले से ही भू-राजनीतिक जोखिमों पर नजर रख रहा है और किसी भी नए घटनाक्रम से तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार लागत पर असर पड़ सकता है।

कूटनीतिक समाधान की कोशिश जारी

युद्ध और आर्थिक दबाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत के प्रयास जारी हैं। कतर के प्रधानमंत्री ने ईरानी अधिकारियों के साथ मुलाकात कर तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुचारू बनाने की दिशा में बातचीत की है। हालांकि पहले के संघर्षविराम प्रयासों को स्थायी सफलता नहीं मिली है। ईरान के सामने एक तरफ महंगाई और बेरोजगारी जैसी घरेलू आर्थिक चुनौतियां हैं, तो दूसरी तरफ प्रतिबंधों और व्यापारिक दबाव से निपटने की चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर होने वाले फैसले ईरान की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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