कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
आजम खान से केवल इसलिए मिलना चाहते थे अखिलेश? AIMIM के वारिस पठान ने किया ये दावा      सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      Investigation : BIPARD में गेस्ट फैकल्टी बन अधिकारियों ने 3 साल में कमाये 8 करोड़, पैनल में नाम नहीं फिर भी हुआ पेमेंट      प्रदूषण पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस सख्त: अब WhatsApp से होगी निगरानी, नियमों को तोड़ने वाली बसों पर लगेगा ब्रेक      EC के अफसर पर बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप: RTI से खुलासा- दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकाय...      Tiger Shroff की चोटों का वीडियो पहली बार आया सामने, फायरिंग के बाद दिखे शरीर पर निशान      फिर चालबाजी कर रहा चीन, अरुणाचल सीमा पर बढ़ा तनाव, कई जगहों पर आमने-सामने के हालात      पीएम मोदी 'चिन्मय अमृत महोत्सव' में शामिल होंगे: संस्थान आम लोगों तक गीता का ज्ञान पहुंचा रहा; पिछले साल भी...     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
शिक्षा

ऐतिहासिक त्रासदी: विभाजन भारतीय इतिहास का धुंधला और पीड़ादायक अध्याय है

देश के विभाजन की घटना को लेकर एक बार फिर अकादमिक चर्चा तेज हो गई है, जिसमें शैक्षणिक जगत के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने इस दर्दनाक दौर पर अपने विचार रखे हैं।

X
Kantap News डेस्क
15 अग 2026, 12:04
ऐतिहासिक त्रासदी: विभाजन भारतीय इतिहास का धुंधला और पीड़ादायक अध्याय है
भारतीय इतिहास के सबसे संवेदनशील और गहरे जखم देने वाले पन्नों में देश का विभाजन आज भी दर्ज है। हाल ही में आयोजित एक अकादमिक चर्चा के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति ने इस विषय पर खुलकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बंगाल और देश के अन्य हिस्सों को चीरने वाली यह घटना हमारे अतीत का एक ऐसा पहलू है जो आज भी धुंधला होने के साथ-साथ अत्यंत पीड़ादायक बना हुआ है।

अतीत के पन्नों से सीख

विभाजन के दौरान हुए मानवीय विस्थापन, अपनों से बिछड़ने के गम और अनगिनत कुर्बानियों को आज भी भुलाया नहीं जा सकता है। वक्ताओं का मानना है कि नई पीढ़ी को इस ऐतिहासिक सच्चाई से अवगत कराना बेहद जरूरी है ताकि वे अपने देश के संघर्षशील अतीत को समझ सकें। इतिहास के इन काले अध्यायों से केवल वेदना ही नहीं मिलती, बल्कि यह हमें एकजुट रहने और देश की अखंडता को बनाए रखने का कड़ा संदेश भी देते हैं। इस प्रकार के विचार गोष्ठियों का मुख्य उद्देश्य समाज में ऐतिहासिक चेतना को जीवित रखना है। देश के विभाजन जैसी त्रासदियों का स्मरण करना हमें भविष्य के लिए अधिक सजग और संवेदनशील बनाता है। यह समय उन सभी अज्ञात पीड़ितों को याद करने का भी है जिन्होंने इस दौर में अपनी सब कुछ खो दिया था, और यह सुनिश्चित करने का है कि ऐसी मानवीय आपदाएं दोबारा कभी न दोहराई जाएं।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज