पिछले कुछ दिनों से असम में आफत बने बाढ़ के पानी के स्तर में अब धीरे-धीरे मामूली गिरावट दर्ज की जाने लगी है, जिससे प्रशासन और आम जनता ने राहत की सांस ली है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मपुत्र और कोपिली नदियों का जलस्तर अब खतरे के निशान से थोड़ा नीचे आना शुरू हो गया है। हालांकि, कई जिलों में बाढ़ का पानी अभी भी गांवों की गलियों और घरों में जमा हुआ है, जिसके कारण सामान्य जनजीवन पटरी पर लौटने में अभी और समय लग सकता है। राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने जानकारी दी है कि वर्तमान में प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 10 रह गई है और शिविरों में रहने वाले लोगों की संख्या में भी कमी आई है। फिर भी किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और चौकस बना हुआ है।
राहत शिविरों में स्वास्थ्य और स्वच्छता सेवाएं राहत शिविरों में शरण लिए हुए हजारों नागरिकों के लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता विभाग ने विशेष कैंप लगाए हैं ताकि किसी भी महामारी फैलने के खतरे को समय रहते रोका जा सके। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें लगातार शिविरों का दौरा कर रही हैं और बच्चों व बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं। पीने के पानी के शुद्धिकरण के लिए क्लोरीन की गोलियां और पानी के टैंकर बड़ी संख्या में प्रभावित क्षेत्रों में भेजे जा रहे हैं। स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और गैर-सरकारी संस्थाएं भी इस मुश्किल समय में प्रशासन के साथ कंधे से कंधا मिलाकर राहत सामग्री और पका हुआ भोजन वितरित करने में जुटी हुई हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को पौष्टिक आहार और दूध समय पर मिल सके।
बुनियादी ढांचे की बहाली और पुनर्निर्माण कार्य बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही अब प्रशासन का मुख्य ध्यान बुनियादी ढांचे की तत्काल बहाली और मरम्मत कार्यों पर केंद्रित हो गया है। टूटी हुई सड़कों और क्षतिग्रस्त पुलों का आकलन करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की विशेष टीमों को मैदान में उतार दिया गया है। बिजली विभाग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है ताकि उन इलाकों में बिजली की आपूर्ति बहाल की जा सके जहां बाढ़ के कारण ट्रांसफार्मर और खंभे क्षतिग्रस्त हो गए थे। राज्य के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि बाढ़ से हुए नुकसान का एक विस्तृत सर्वेक्षण जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि प्रभावित किसानों और मकान मालिकों को उचित मुआवजा राशि समय पर दी जा सके। सरकार की यह प्राथमिकता है कि हर एक पीड़ित परिवार को इस आपदा से उबार कर फिर से सामान्य जीवन की मुख्यधारा में लाया जाए।