असम राज्य में मानसून की भारी बारिश और ऊपरी इलाकों से आ रहे पानी के कारण स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके चलते राज्य के लगभग 12 जिलों में भयंकर बाढ़ आ गई है। जिला प्रशासन से प्राप्त शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा से करीब 4.5 लाख से अधिक आम नागरिक सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। निचले इलाकों में पानी भर जाने के कारण हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संबंधित जिला आयुक्तों के साथ उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक की है और बचाव कार्यों में तेज़ी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तुरंत प्रभाव से संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है ताकि फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ए एस डी एम ए) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, बारपेटा, धेमाजी, लखीमपुर, और डिब्रूगढ़ जिले इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों में कई मुख्य सड़कें पानी में डूब चुकी हैं और पुलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे सड़क संपर्क पूरी तरह से बाधित हो गया है। प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों के बीच खाद्यान्न, पेयजल, तिरपाल और जीवन रक्षक दवाओं का वितरण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि बाढ़ के पानी से फैलने वाली जलजनित बीमारियों जैसे डायरिया और मलेरिया पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सके। कृषि क्षेत्र को भी भारी क्षति पहुंची है, जहां हज़ारों हेक्टेयर में खड़ी धान की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी और भविष्य की रणनीति भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आगामी 48 घंटों के दौरान असम और उसके पड़ोसी राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने का येलो अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर सभी स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों को अगले आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया है। जल संसाधन मंत्री ने जानकारी दी है कि तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है और कमजोर जगहों पर युद्ध स्तर पर मरम्मत का काम चल रहा है। केंद्र सरकार की ओर से भी हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया गया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय स्थिति पर लगातार अपनी पैनी नज़र बनाए हुए है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में आपदा नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।