मंगलुरु में छुट्टियों के दौरान परीक्षा का बहिष्कार
दशहरा के त्योहारी अवकाश के मौके पर परीक्षा कराए जाने को लेकर छात्रों ने अपना तीखा विरोध दर्ज कराया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दक्षिण कन्नड़ जिले के प्रमुख शहर मंगलुरु में यह अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। निर्धारित छुट्टियों के दिनों में परीक्षा रखे जाने से नाराज विद्यार्थियों ने इस शैक्षणिक गतिविधि का कड़ा विरोध किया। छात्रों का स्पष्ट कहना था कि त्योहारी और अवकाश के दिनों में किसी भी प्रकार की परीक्षा का आयोजन नहीं होना चाहिए। इस नाराजगी के चलते बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर परीक्षा देने से साफ इनकार कर दिया। विद्यार्थियों ने परीक्षा को बीच में ही छोड़कर या परीक्षा का बहिष्कार करके अपना असंतोष पूरी तरह से जाहिर कर दिया। परीक्षा छोड़ने वाले इन छात्रों के इस कदम से शैक्षणिक हलकों में हड़कंप मच गया और तुरंत ही इस घटना की चर्चा पूरे इलाके में फैल गई। स्थानीय स्तर पर इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर अवकाश के दिनों में परीक्षा का कार्यक्रम क्यों तय किया गया था।
छात्रों का गुस्सा और परीक्षा छोड़ने की पूरी घटना
त्योहारी अवकाश के दौरान परीक्षा आयोजित होने की बात सामने आते ही छात्रों में गुस्सा फूट पड़ा। मंगलुरु के परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे विद्यार्थियों ने जब परीक्षा पत्र देखा और तारीखों पर गौर किया तो उनका विरोध सामने आ गया। कई छात्रों ने परीक्षा हॉल में प्रवेश करने के बाद पर्चा हल करने से मना कर दिया तो कुछ ने परीक्षा केंद्र के बाहर आकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का तर्क था कि दशहरा जैसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्व के अवकाश में उन्हें अपनी परीक्षा की तैयारी करने या परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलना चाहिए था। इस तरह की महत्वपूर्ण छुट्टियों के दौरान परीक्षा थोपने से छात्रों की मानसिक स्थिति और त्योहारी उत्सव दोनों पर असर पड़ता है। विरोध करने वाले विद्यार्थियों ने अनुशासनात्मक नियमों का पालन करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से परीक्षा का बहिष्कार किया। हालांकि इस अचानक हुए परीक्षा बहिष्कार से परीक्षा कक्ष में तैनात शिक्षकों और निरीक्षकों के सामने भी एक अजीब असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। शिक्षकों ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया लेकिन छात्र अपनी बात पर अड़े रहे और उन्होंने परीक्षा देने से पूरी तरह से किनारा कर लिया।
त्योहारी परीक्षाओं का संदर्भ और इसका महत्व
भारत में शैक्षणिक संस्थानों द्वारा छुट्टियों के दिनों में परीक्षा आयोजित करने का यह मामला कोई नया नहीं है। देश भर के कई स्कूल और कॉलेज अक्सर पाठ्यक्रम पूरा करने के दबाव में छुट्टियों के दौरान भी कक्षाएं या परीक्षाएं आयोजित कर देते हैं। लेकिन इस प्रकार के निर्णयों से छात्रों और उनके अभिभावकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। दशहरा और दीपावली जैसे पावन पर्वों पर छात्र अपने घरों पर उत्सव मनाने की योजना बनाते हैं। ऐसे समय में परीक्षा का दबाव होने पर छात्र न तो ठीक से पढ़ाई कर पाते हैं और न ही त्योहार का आनंद ले पाते हैं। मंगलुरु की इस घटना ने एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे को देश के सामने ला खड़ा किया है कि क्या अवकाश के दिनों में परीक्षा लेना उचित है। शिक्षाविदों का मानना है कि शिक्षण संस्थानों को परीक्षा का समय सारणी बनाते समय विद्यार्थियों की मानसिक और पारिवारिक भावनाओं का पूरा ध्यान रखना चाहिए। इस तरह के विरोध प्रदर्शन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थानों पर दबाव बनाने का काम करते हैं ताकि छात्र अपने त्योहारों को बिना किसी तनाव के मना सकें।