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शिक्षा ब्रेकिंग

बड़ा खुलासा: देश के 8.7 करोड़ युवा शिक्षा और रोजगार से हैं पूरी तरह दूर

नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट में देश के युवाओं की स्थिति को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिसके अनुसार बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई और नौकरी दोनों से बाहर हैं।

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Ankit Yadav
23 अग 2026, 10:33
बड़ा खुलासा: देश के 8.7 करोड़ युवा शिक्षा और रोजगार से हैं पूरी तरह दूर
नीति आयोग द्वारा हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों ने देश भर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लगभग 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं जो वर्तमान में न तो किसी शैक्षणिक संस्थान में अध्ययनरत हैं और न ही किसी प्रकार के रोजगार या नौकरी से जुड़े हुए हैं। इस चौंकाने वाली स्थिति ने देश की जनसांख्यिकीय लाभांश यानी डेमोग्राफिक डिविडेंड की क्षमता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विशाल युवा आबादी को मुख्यधारा में शामिल नहीं किया गया, तो यह आर्थिक विकास के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

रोजगार और कौशल विकास की स्थिति

देश के नीति निर्माताओं के सामने यह एक गंभीर विषय बन गया है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में युवा किस गतिविधि में संलग्न हैं। हालांकि भारत को दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है, जहां कामकाजी उम्र की आबादी बहुतायत में है, लेकिन औपचारिक शिक्षा और श्रम बाजार से इनकी यह दूरी चिंताजनक है। विश्लेषकों का कहना है कि कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगार सृजन की नीतियों में जमीनी स्तर पर और अधिक तेजी लाने की आवश्यकता है, ताकि युवाओं की इस ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग किया जा सके। पारंपरिक रूप से शैक्षणिक डिग्रियां प्राप्त करने के बाद भी युवाओं को मन मुताबिक काम न मिलना इस समस्या का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इसके अलावा, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच रोजगार के अवसरों में भारी अंतर होने के कारण भी कई युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी भी व्यावसायिक गतिविधि से नहीं जुड़ पाते हैं। ग्रामीण इलाकों में कृषि क्षेत्र पर निर्भरता कम होने और अन्य उद्योगों का पर्याप्त विस्तार न होने के कारण स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है, जिससे युवा बेरोजगारी और निष्क्रियता का शिकार हो जाते हैं।

आगे की रणनीति और सरकारी प्रयास

इस प्रकार के आंकड़ों के सामने आने के बाद अब विभिन्न स्तरों पर मंथन शुरू हो चुका है। सरकार और नीति निर्माताओं को उम्मीद है कि आगामी समय में रोजगारोन्मुख शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इसके साथ ही निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाकर अधिक से अधिक नौकरियां पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि देश की इस युवा शक्ति को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिल सके।
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