कर्मचारियों का मोर्चा और आंदोलन की चेतावनी
शिक्षा बोर्ड प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ काम करने वाले सभी संबंधित कर्मचारियों ने मिलकर एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। प्राप्त ताजा जानकारियों के अनुसार बोर्ड के इन कर्मचारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए एक बड़े जन आंदोलन की सीधी चेतावनी दे डाली है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन को और अधिक तेज कर देंगे। इस स्थिति के कारण बोर्ड कार्यालय परिसर में भी गहमागहमी का माहौल बना हुआ है और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच भी हलचल तेज हो गई है। कर्मचारियों के इस तेवर से साफ जाहिर होता है कि आने वाले दिनों में बोर्ड प्रशासन के साथ उनका टकराव और अधिक बढ़ सकता है। बोर्ड के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर लगाताराम लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं लेकिन अब उन्होंने सीधे तौर पर बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर शिक्षा बोर्ड के कामकाज और व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
प्रशासन पर अनदेखी के आरोप और पदोन्नति का पेच
शिक्षा बोर्ड के कर्मचारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर पूरी तरह से अनदेखी करने के गंभीर और कड़े आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का मुख्य रूप से यह कहना है कि उनकी पदोन्नति यानी प्रमोशन के मामलों में लगातार पेच फंसाया जा रहा है जिससे उनका हक मारा जा रहा है। बोर्ड प्रशासन उनकी जायज मांगों और पदोन्नति से जुड़ी फाइलों पर ध्यान नहीं दे रहा है जिससे कर्मचारियों के भीतर भारी रोष व्याप्त है। पिछले काफी समय से वे अपनी इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसी लाचारी और नाराजगी के चलते कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ इस मोर्चाबंदी को अंजाम दिया है। कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि उनकी समस्याओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है जिससे उनका मनोबल गिर रहा है और कार्यक्षेत्र में असंतोष की भावना फैल रही है। बोर्ड के भीतर चल रहे इस आंतरिक विवाद और पदोन्नति के पेंच को सुलझाने के लिए अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कर्मचारी अपनी मांगों पर पूरी तरह से अड़े हुए हैं और उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक मामलों का समाधान नहीं किया जाता तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन किसी भी सूरत में शांत नहीं होने वाला है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और ट्रस्ट का संचालन
दूरदृष्टा और जनचेतना के महान अग्रदूत माने जाने वाले वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं प्रख्यात समाजप सेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर से जो अब पाकिस्तान में स्थित है, ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन बहुत ही धूमधाम से शुरू किया था। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का पूरा संचालन और प्रबंधन एक विशेष ट्रस्ट के माध्यम से ही किया जाता है। हमें हमारे दूरदर्शी ट्रस्टियों में डॉ। तुलसीदास जी जो इसके प्रेसीडेंट हैं, इसके अलावा न्यायमूर्ति डी। महाजन और लेफ्टिनेंट जनरल पी। का मार्गदर्शन प्राप्त है। इस ऐतिहासिक और वैचारिक पृष्ठभूमि से जुड़ा यह प्रकाशन संस्थान समाज में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान रखता है। वर्तमान समय में इस ट्रस्ट के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण कार्य संचालित किए जाते हैं और शिक्षा तथा समाज सेवा के क्षेत्र में इसका उल्लेखनीय योगदान रहा है। बोर्ड कर्मचारियों के इस वर्तमान आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के बीच इस संस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके ट्रस्ट का संचालन अपने आप में एक बड़ा महत्व रखता है। इतिहास के इन पन्नों और महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्थाओं और कर्मचारियों के अधिकारों के बीच तालमेल बिठाने की आवश्यकता पर भी बल दिया जा रहा है। आने वाले समय में बोर्ड प्रशासन और कर्मचारियों के बीच होने वाली बैठकों या वार्ताओं से ही यह तय हो पाएगा कि इस गतिरोध का क्या अंत निकलता है।