हाई स्कूल स्तर पर कमरों की वास्तविक स्थिति
हिमाचल प्रदेश के भीतर संचालित होने वाले हाई स्कूल स्तर के सरकारी संस्थानों में कम कमरों की बड़ी समस्या सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्यभर में कुल 967 हाई स्कूल दर्ज किए गए हैं। इनमें से बेहद दयनीय स्थिति पांच संस्थानों की है जिनके पास केवल एक कमरा उपलब्ध है। इसके अलावा 27 ऐसे हाई स्कूल भी चिन्हित किए गए हैं जो केवल दो कमरों के सहारे ही अपनी कक्षाएं चला रहे हैं। मध्यम स्थिति वाले संस्थानों में 138 हाई स्कूल ऐसे हैं जहां तीन कमरों की व्यवस्था है। इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि सबसे अधिक 714 हाई स्कूल चार से छह कमरों के बीच संचालित हो रहे हैं। बेहतर स्थिति वाले संस्थानों की संख्या और कम है क्योंकि केवल 68 हाई स्कूल सात से दस कमरों की श्रेणी में आते हैं। इसके अतिरिक्त 13 हाई स्कूल ऐसे हैं जिनके पास 11 से 15 कमरे मौजूद हैं। केवल दो ही ऐसे हाई स्कूल दर्ज किए गए हैं जहां 15 से अधिक कमरों की सुविधा उपलब्ध है।
वरिष्ठ माध्यमिक संस्थानों में कमरों का विवरण
राज्य के वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में भी बुनियादी ढांचे की कमी के ऐसे ही आंकड़े सामने आए हैं। इन उच्चतर माध्यमिक संस्थानों की कुल संख्या 1,975 दर्ज की गई है। इनमें से दो वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के पास केवल एक ही कमरा उपलब्ध है। तीन अन्य वरिष्ठ माध्यमिक संस्थानों का संचालन केवल दो कमरों के भीतर किया जा रहा है। इसके अलावा 20 ऐसे वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल हैं जिनके पास कुल तीन कमरे ही हैं। इन संस्थानों में थोड़ा बड़ा ढांचा चार से छह कमरों वाले 224 स्कूलों में देखने को मिलता है। इस श्रेणी में सबसे बड़ा हिस्सा मध्यम और बड़े संस्थानों का है जहां 1,034 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में सात से दस कमरे दर्ज किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 464 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं जिनके पास 11 से 15 कमरों की व्यवस्था है। राज्य में कुल 228 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं जिनके पास 15 से अधिक कमरे उपलब्ध दर्ज किए गए हैं।
शैक्षणिक संस्थानों के ढांचे की व्यापक समीक्षा
सरकारी शिक्षा प्रणाली के इन आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि प्रदेश के दोनों प्रमुख स्कूली स्तरों पर स्थिति भिन्न है। हाई स्कूल स्तर पर चार से छह कमरों वाले स्कूलों की बहुतायत है जबकि वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर सात से दस कमरों वाले संस्थान सबसे अधिक संख्या में मौजूद हैं। हालांकि दोनों ही स्तरों पर कुछ ऐसे स्कूल भी हैं जो अत्यधिक कम कमरों के संकट से जूझ रहे हैं। एक और दो कमरों में पढ़ाई कराने वाले स्कूल इस बात का प्रमाण हैं कि बुनियादी सुविधाओं का विस्तार अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। दूसरी ओर बड़े परिसरों वाले स्कूल भी मौजूद हैं जहां 15 से अधिक कमरे दर्ज हैं लेकिन उनकी संख्या कम है। शिक्षा विभाग की इन रिपोर्टों से यह बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संचालित होने वाले इन सरकारी संस्थानों में कमरों की संख्या का वितरण असमान है। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के मुकाबले कई संस्थानों में पर्याप्त कक्षाओं का होना आज भी एक गंभीर प्रशासनिक आवश्यकता के रूप में खड़ा है।